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फिटनेस का नया फंडा, अब भारतीय क्रिकेटरों का हो रहा है डीएनए टेस्ट

बीसीसीआई अच्छी फिटनेस के लिए अब क्रिकेटरों का डीएनए टेस्ट करा रही है।
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नई दिल्ली

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Prabhanshu Ranjan

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Updated: 12 Nov 2017, 10:55 PM IST

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नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने अपने क्रिकेटरों के फिटनेस स्तर को बनाए रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड अब सभी खिलाडिय़ों का डीएनए टेस्ट कराएगी। जिससे खिलाडिय़ों की आनुवंशिक फिटनेस स्थिति का पता चल सकेगा। इस जांच से खिलाडिय़ों को अपना दमखम बढ़ाने में मदद मिलेगी। बोर्ड ने टीम के ट्रेनर शंकर बासु की सिफारिश पर यह कदम उठाया है। इस जांच के बाद खिलाडिय़ों को लंबे समय तक फिट रहने में मदद मिलेगी। बता दें कि पिछले कुछ दशकों में टीम इंडिया में फिटनेस के लिए काफी कदम उठाए गए है। हाल ही में टीम में इंट्री के लिए यो यो टेस्ट को अनिवार्य बनाया जा चुका है। टीम के कप्तान कोहली की गिनती दुनिया के सबसे फिट खिलाड़ियों में की जाती है।

बास्केटबाल में किया जा चुका प्रयोग

बोर्ड के इस फैसले के बारे में जानकारी देते हुए एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हमने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए पिछले कुछ समय से डीएनए परीक्षण शुरू किया है। यह फिटनेस के नए मापदंडों के अनुसार किया जा रहा है, जिसे टीम प्रबंधन ने तय किया है। गौरतलब हो कि क्रिकेट से पहले बास्केटबाल में खिलाडिय़ों का डीएनए टेस्ट किया जा चुका है। जिसका सकारात्मक रुझान अमरीका में देखा गया था।

25 से 30 हजार का आएगा खर्च

इस टेस्ट में बोर्ड को प्रति खिलाड़ी औसतन 25 से 30 हजार रूपए खर्च करने होगे। टेस्ट के माध्यम से इस बात की जानकारी मिलेगी कि खिलाडिय़ों को किस प्रकार का भोजन करना चाहिए। साथ ही यह टेस्ट शरीर की क्षमताओं के बारे में भी बताएगा। इससे इस बात की जानकारी मिलेगी कि किसी खास खिलाड़ी के लिए किस तरह का खाना और कसरत अधिक प्रभावी होगा।

बोर्ड के अधिकारी ने बताया कि जब परीक्षण शुरू किए गए तो कुछ खिलाड़ियों को पता चला कि वे लैक्टोज को नहीं पचा पाते हैं, जो दूध में मौजूद होता है या जो खिलाड़ी मटन बिरयानी खाने के शौकीन हैं उन्हें पता चला कि किसी खास प्रकार का भोजन करने के बाद उनका शरीर क्या मांगता है। अधिकारी ने आगे बताया कि अब डीएनए परीक्षण किया जा रहा है ताकि एक निश्चित वसा प्रतिशत को बनाए रखने के लिए शरीर की जरूरतों का पता लगाया जा सके। कुछ खिलाड़ी बचपन से ही प्रचुर मात्रा में दूध पीते रहे हैं क्योंकि आम धारणा है कि दूध से आपको मजबूती मिलती है। इसके बाद उन्हें पता चलता है कि कड़े अभ्यास के बाद भी उनका शरीर वर्तमान में खेल की जरूरतों के हिसाब से खरा नहीं उतर पा रहा है।