
शिरडी जाने से पहले हिरासत में ली गईं तृप्ति देसाई, पीएम के काफिले को रोकने की दी थी धमकी
नई दिल्ली। भूमाता ब्रिगेड की अध्यक्ष तृप्ति देसाई ने सबरीमाला मंदिर में प्रवेश को लेकर एक बार आंदोलन शुरू कर दिया है। लेकिन पुणे पुलिस ने उन्हें शिरडी जाने से पहले हिरासत में ले लिया। हिरासत में लेने की बात को लेकर तृप्ति देसाई और पुलिस के बीच जमकर बहस हुई। पुलिस ने तृप्ति देसाई को लगभग उठाकर कार में डाल दिया। वह शिरडी में पीएम मोदी से मिलने जा रही थीं। आपको बता दें कि पीएम मोदी आज साईंबाबा की समाधि के सौ साल होने पर पूरे होने पर आयोजित महोत्सव के समापन समारोह में शिरकत करेंगे।
एसपी अहमदनगर को लिखा खत
तृप्ति ने पीएम मोदी से मुलाकात को लेकर एसपी अहमदनगर को पत्र लिखा था। वह सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने से पहले पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात करना चाहती थीं। इसके लिए गुरुवार को उन्होंने अहमदनगर के एसएसपी को पत्र भी लिखा था। पत्र में पीएम मोदी से मुलाकात की व्यवस्था कराने की मांग की थी। तृप्ति देसाई सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर पीएम मोदी से बात करना चाहती थीं। तृप्ति देसाई ने धमकी दी थी कि अगर पीएम से उनकी मुलाकात की व्यवस्था नहीं की जाएगी तो वे अपने समर्थकों के साथ पीएम के काफिले को शिरडी पहुंचने से पहले ही रोक देंगी।
आवाज दबाने की कोशिश
भूमाता ब्रिगेड की तृप्ति ने कहा कि उनके घर के बाहर सुबह से ही पुलिस तैनात थी। तृप्ति के मुताबिक जैसे ही वो अपने समर्थकों के साथ घर से निकलीं पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। तृप्ति ने कहा कि विरोध करना हमारा संवैधानिक अधिकारी है। हमें घर में ही रोक लिया गया है। ये हमारे आवाज को दबाने की कोशिश है।
पीएम करेंगे विशेष पूजा
प्रधानमंत्री मोदी आज एक विशेष विमान से शिरडी के नए हवाई अड्डे पर उतरेंगे और वहां से हेलीकॉप्टर से साईंबाबा संस्थान न्यास (एसएसएसटी) के लिए रवाना होंगे। वहां मंदिर में विशेष पूजा करने के बाद एक विशेष ध्वज फहराएंगे। सभी समुदायों में पूजनीय साईंबाबा का देहावसान 1918 में दशहरा के ही दिन अहमद नगर जिले के शिरडी गांव में हुआ था। उनकी समाधि की शताब्दी पर न्यास द्वारा पूरे साल उत्सव मनाया गया। पीएम इस कार्यक्रम का 19 अक्टूबर को समापन करेंगे।
तनाव बरकरार
आपको बता दें कि केरल स्थित सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल आयुवर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर रोक को लेकर दूसरे दिन भी तनाव बरकरार है। स्थानीय महिलाएं सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का विरोध कर रही हैं। जबकि मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश देने की इच्छुक महिलाएं हर हाल में मंदिर में प्रवेश करना चाहती हैं।
Published on:
19 Oct 2018 09:06 am
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