
Icon Players in Indian Premier League: साल 2008 में इंडियन प्रीमियर लीग के पहले संस्करण में पांच भारतीय क्रिकेटरों को आइकन प्लेयर का दर्जा दिया गया था। ये खिलाड़ी अपने-अपने शहरों या राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले फ्रेंचाइजी के लिए चुने गए थे। ऐसा इसलिए हुआ था कि लोकल फैंस के बीच लीग की लोकप्रियता बढ़ाई जा सके। आइकन प्लेयर नीलामी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं थे और उन्हें अपने फ्रेंचाइजी में पहले से ही शामिल किया गया था। इसके अलावा, उन्हें अपने टीम के सबसे अधिक भुगतान पाने वाले खिलाड़ी से कम से कम 15% अधिक भुगतान की गारंटी थी। ये सब उस समय के आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी के दिमाग की उपज थी।
इन सब की शुरुआत तब हुई जब ऑक्शन से पहले सचिन तेंदुलकर पर चर्चा चल रही थी। भारत में सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट का भगवान माना जाता है। ऐसे में उनपर बोली लगाना या उन्हें ऑक्शन में बेचना किसी को अच्छा नहीं लग रहा था। तब ललीत मोदी ने एक सुझाव दिया और बताया कि भारत के कुछ खिलाड़ियों को आइकन प्लेयर का दर्जा देकर इन सब से बचा जा सकता है। ऐसे में ललीत मोदी की वजह से ही सहवाग, युवराज, सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ पर बोली नहीं लगी।
अधिकांश आइकन प्लेयर अपनी-अपनी टीमों के कप्तान बने, जिससे फ्रेंचाइजी को अनुभवी नेतृत्व मिला। इसके अलावा हैदराबाद फ्रेंचाइजी ने वी.वी.एस. लक्ष्मण को आइकन प्लेयर बनाने का अनुरोध किया था, लेकिन लक्ष्मण ने अपना नाम वापस ले लिया, इसलिए डेक्कन चार्जर्स के पास कोई आइकन प्लेयर नहीं था। साल 2010 के बाद आइकन प्लेयर की अवधारणा समाप्त हो गई। क्योंकि फ्रेंचाइजी को लगता था कि इससे नीलामी में बजट कम हो जाता है।
सचिन तेंदुलकर (मुंबई इंडियंस)- 4,48,50000 रुपए
विरेंद्र सहवाग (दिल्ली कैपिटल्स)- 3,33,50000 रुपए
युवराज सिंह (पंजाब किंग्स)- 4,25,50000 रुपए
राहुल द्रविड़ (रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु)- 4,14,00000 रुपए
सौरव गांगुली (कोलकाता नाइट राइडर्स)- 4,370000 रुपए
Published on:
05 May 2025 05:19 pm
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