फैसले लेने की दी खुली छूट-
राहुल ने कहा कि उनके माता-पिता ने उनको अपनी जिंदगी के फैसले लेने की खुली छूट दी और एक अच्छा इंसान बनने की सीख दी। बकौल राहुल, "मेरे पिता मेरे दादाजी के जैसे थे, लेकिन बड़ा अंतर यह था कि मेरे पिता ने मुझे और मेरी बहनों को अपने हिसाब से जिंदगी जीने की छूट दी थी। ऐसा नहीं है कि मेरे दादाजी ने नहीं दी थी, लेकिन उस समय बड़े लोग ही अपने बच्चों की जिंदगी के अहम फैसले लिया करते थे। मेरे पिता ने हमेशा मुझे सिखाया कि जिंदगी में कुछ भी करो, लेकिन एक अच्छा इंसान बनो। यह बात उन्होंने हमें बचपन से सिखाई।"