
नई दिल्ली।भारतीय दिग्गज गेंदबाज आशीष नेहरा ने बुधवार को भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए पहले टी20 के बाद सन्यास ले लिया। उनका सन्यास क्रिकेट प्रेमियों के लिए भावनात्मक क्षण था। उनके सन्यास को ले कर सबसे ज्यादा भावुक उनके साथी खिलाड़ी युवराज सिंह हुए। उनके आखरी मैच के पहले उनके दोस्त युवराज ने अपने फेसबुक पर एक भावुक पोस्ट में डाला। पोस्ट में उन्होंने नेहरा को एक सच्चा दोस्त बताया। पोस्ट के जरिये युवराज ने अपनी और नेहरा की कई पुरानी यादें साझा की। युवराज ने बताया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने नेहरा को पोपट नाम दिया था क्योंकि वो बहुत बात करते है। युवी ने कहा नेहरा जी पानी के अंदर भी बात कर सकते है, उन्होंने नेहरा से अपनी पहली मीटिंग का भी ज़िक्र किया।
"रेसिलिएंस ऑफ़ आशीष नेहरा" नाम से युवराज ने पोस्ट किया
मैं अपने दोस्त आशु के बारे में पहली चीज़ यही कहूंगा की वह दिल के बहुत साफ़ और बेहद ईमानदार इंसान है। शायद केवल होली बुक ही उससे ज्यादा ईमानदार होगी। मुझे पता है कि कुछ लोग ये सुन कर आश्चर्य चकित होंगे उनकी आंखे बाड़ी हो जाएंगी। आशू कुछ लोगों के लिए बहुत स्पष्टवादी था और इस वजह से उसको कई बार बहुत कुछ झेलना पड़ा है। लेकिन मेरे लिए वो हमेशा आशु या नेहरा जी ही रहेगा। एक मजेदार और ईमानदार इंसान जिसने अपनी टीम को कभी पीछे नहीं छोड़ा। पहली बार मैं नेहरा से अंडर 19 के दिनों में मिला था और नेहरा भारतीय टीम के लिए चुने गए थे। वो हरभजन के साथ रूम शेयर कर रहा था। मैं भज्जी को देखने गया था और मैंने देखा कि यह लंबा, दुबला लड़का जो एक मिनट भी सीधा खड़ा नहीं हो सकता था। वह एक बहुत गरम टिन के छत पर बैठी बिल्ली की तरह था। एक मिनट वह शांत बैठता था लेकिन अगले की मिनट झटपटाएगा और अपनी आँखे घुमाएगा। ये देख कर मुझे बहुत हसी आ रही थी ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उसकी पैंट में चीटिया छोड़ दी हो। बाद मै मुझे एहसास हुआ की आशु ऐसा ही है वो एक जगह सीधा नहीं बैठ सकता।
नेहरा को सौरव गांगुली ने दिया था ये नाम
भारतीय पूर्व कप्तान सौरव गांगुली नेहरा को पोपट बुलाते थे। क्योकि नेहरा पोपट की तरह बोलते ही रहते थे। युवराज ने कहा नेहरा इतना बोलते है की वो पानी के अंदर भी बात कर सकते है और सब को बहुत हसते है। मेरे लिए उसे बोलने की ज़रूरत नहीं है, उसके शरीर की भाषा ही कुछ ऐसी है जिससे मुझे हसी आती है। अगर आप आशीष नेहरा के साथ हो तो आप का दिन खराब नहीं जा सकता नो चान्स। वो बंदा आप को हिस्सा-हिस्सा के गिरा देगा। मैंने उसे कभी नहीं बताया, लेकिन मैंने उससे बहुत प्रेरणा ली है। में सोचता था अगर 38 की उम्र में इतनी सारी छोटो और सर्जरी के बाद ये इतनी तेज़ गेंदबाजी कर सकता है तो मैं 36 साल की उम्र मै अच्छी बैटिंग तो कर ही सकता हू। सच कहूँ तो आज भी मुझे ये बात आगे बढ़ने और अच्छा करने की प्रेरणा देती है।
72 घंटे में नेहरा ने 30 से 40 बार अपने टखने की आइसिंग की
नेहरा जी 11 से भी ज्यादा सर्जरी करा चुके है यह उनका हार्ड वर्क और क्रिकेट खेलने का जूनून ही है की 38 की उम्र में भी वह इतनी तेज़ गेंदबाजी कर रहे है।
2003 वर्ल्ड कप के दौरान नेहरा का टखने बुरी तरह मुड़ गया था और इंग्लैंड के खिलाफ होने वाला अगला मुकाबला वो नहीं खेल सकता था लेकिन नेहरा ने सब को परेशान कर दिया की वह खेलेगा अगले 72 घंटे में नेहरा ने 30 से 40 बार अपने टखने की आइसिंग की, पेन किलर खाई और खेलने के लिए तैयार हो गया। उसके बाद तो दुनिया ने देखा उस मैच में नेहरा ने क्या किया मात्र 23 रन दे कर नेहरा ने 6 विकेट झटके और भारत ने इंग्लैंड को 83 रनो से हराया। आशु ने 2011 विश्वकप के सेमीफइनल में पाकिस्तान के खिलाफ बहुत अच्छी गेंदबाजी की थी लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण उन्हें चोट लग गई और वह फाइनल नहीं खेल सके। वह हमेशा हस्ते रहते थे और सब की मदद के लिए हाज़िर रहते थे। हाथ में चोट लगने के बाद भी वह फाइनल में ड्रिंक्स और टॉवल ले कर युवा गेंदबाजों को सलाह दे रहे थे। बाहरी लोगो के लिए ये आम बात होगी लेकिन जब आप टीम गेम खेलते है और आप के पास एक नेहरा जैसा अनुभवी खिलाड़ी हो जो टीम को सब कुछ देने को तैयार है तो हौसला बढ़ जाता है।
नेहरा के दो बच्चे है बेटा आरुष और बेटी आरैना। आरुष भी बोलिंग करते है लेकिन उसका एक्शन उसके पिता से बहुत अच्छा है। नेहरा अपनी बल्लेबाजी को ले कर कभी विनम्र नहीं थे। युवी ने कहा मुझे सबसे ज्यादा हसी तब आती थी जब नेहरा अपनी बैटिंग को लेजेंड्री कहते थे और कहते थे अगर में बल्लेबाज होता तो 45 साल तक खेलता। युवी ने कहा यह मेरे लिए एक भावनात्मक समय है और मुझे यकीन है कि उनके और उनके परिवार के लिए भी। मैं आभारी हूँ क्रिकेट ने मुझे एक सच्चा दोस्त दिया है जिसे में हमेश प्यार करूँगा।
Published on:
02 Nov 2017 12:30 pm
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