मराठा आरक्षण के लिए 17 साल की छात्रा ने लगाई फांसी, सुसाइड नोट में लिखीं कई दर्दनाक बातें

मराठा आरक्षण के लिए 17 साल की छात्रा ने लगाई फांसी, सुसाइड नोट में लिखीं कई दर्दनाक बातें

Kapil Tiwari | Publish: Sep, 11 2018 11:16:32 AM (IST) क्राइम

छात्रा ने सुसाइड नोट में लिखा है कि 10वीं क्लास में 89 प्रतिशत मार्क्स लाने के बाद भी उसे 11वीं कक्षा में साइंस स्ट्रीम नहीं मिली थी।

मुंबई। महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग थमने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार को अहमदनगर जिले में 17 साल की एक छात्रा ने मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आत्महत्या कर ली। घटना राधाबाई काले महिला कॉलेज की है। छात्रा की पहचान बबन काकड़े के रूप में हुई है।

सुसाइड नोट में बताई आत्महत्या की वजह

पुलिस अधीक्षक रंजन कुमार शर्मा ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार को दोपहर 3 बजे छात्रा का शव हॉस्टल के एक कमरे में पंखे से लटका मिला। पुलिस शव के पास से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें आत्महत्या की वजह का जिक्र है। छात्रा ने नोट में लिखा है कि वो मराठा आरक्षण के लिए आत्महत्या कर रही है। छात्रा ने नोट में एक घटना का भी जिक्र करते हुए आगे लिखा है कि इस साल 10वीं की परीक्षा में उसके 89 प्रतिशत मार्क्स आए थे, लेकिन इसके बाद भी 11 वीं कक्षा में साइंस स्ट्रीम में उसी एडमिशन नहीं मिला सका था।

आरक्षण नहीं होने की वजह से दी थी 8000 रुपए फीस

पुलिस ने बताया है कि छात्रा के पिता पेशे से किसान हैं और उन्होंने अपनी बेटी के एडमिशन के लिए 8000 रुपए फीस भरी थी जो कि उनके परिवार के लिए किसी बोझ से कम नहीं थी। वहीं आरक्षण का लाभ लेने वाली छात्राओं को 76 प्रतिशत मार्क्स के साथ एडमिशन मिल गया और उन लड़कियों की फीस भी सिर्फ 1000 रुपए थी।

छात्रा ने भेदभाव का लगाया है आरोप

छात्रा ने सुसाइड नोट में आगे लिखा है कि कॉलेज में इस भेदभाव का सामना उसे इसलिए करना पड़ा क्योंकि वो मराठा जाति की थी और आरक्षण का लाभ नहीं ले रही थी। पुलिस का कहना है कि इस बच्ची की आत्महत्या के बाद मराठा आरक्षण के लिए हो रहे आंदोलन को और बढ़ावा मिलेगा।

राज्य सरकार की हो रही है निंदा

वहीं इस मामले के बाद कई मराठा संगठनों ने राज्य सरकार की निंदा की है। आपको बता दें कि महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण के लिए आरक्षण की मांग लंबे समय से हो रही है, जिसको लेकर कई बार आंदोलन भी किए गए हैं।

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