Fake Job Racket in Delhi: राजधानी दिल्ली में नौकरी के नाम पर लाखों बेरोजगारों को ठगने वाले कई संगठित गिरोह चलते है। गिरोह के शातिर सदस्य बड़ी कंपनियों में वर्क फ्रॉम होम करते हुए अच्छी कमाई का लालच देकर करोड़ों की ठगी करते है। ऐसे ही एक इंटरनेशनल गिरोह का दिल्ली पुलिस ने भंडाफोड़ किया है।
Fake Job Racket in Delhi: मल्टीनेशनल कंपनी Amazon में वर्क फ्रॉम होम दिलाने का वादा कर 11000 लोगों से ठगी करने वाले तीन शातिरों को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सतीश यादव (36), अभिषेक गर्ग (40) और संदीप महला के रूप में हुई है। इन तीनों की गिफ्तारी के बारे में दिल्ली पुलिस ने बताया कि चीन और दुबई में स्थित साइबर बदमाशों के एक अंतर्राष्ट्रीय गिरोह और जॉर्जिया में एक मास्टरमाइंड का भंडाफोड़ किया गया। इनलोगों ने अमेजन में ऑनलाइन वर्क फ्रॉम होम जॉब मुहैया कराने के नाम पर 11,000 लोगों को ठगा है। गिरोह ने ऑनलाइन नौकरी दिलाने के बहाने लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की। पुलिस ने इस सिलसिले में दिल्ली, गुरुग्राम और फतेहाबाद (हरियाणा) में अलग-अलग छापेमारी कर अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
एक महिला की शिकायत पर गिरोह का भंडाफोड़-
पुलिस उपायुक्त, बाहरी उत्तर, देवेश कुमार महला ने कहा कि दिल्ली पुलिस को एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें एक महिला ने कहा था कि अमेजन में ऑनलाइन पार्ट-टाइम नौकरी प्रदान करने की आड़ में कुछ अज्ञात स्कैमर्स द्वारा उसके साथ 1.18 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई थी। शिकायत में महिला ने कहा कि अमेजॅन कंपनी के रूप में प्रस्तुत कुछ अज्ञात अपराधियों ने बड़े घोटाले का मसौदा तैयार किया। तथ्यों का पता लगाने के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया।
बीजिंग से चल रहा था टेलीग्राम आईडी-
जांच के दौरान यह पता चला कि स्कैमर्स द्वारा उपयोग की जाने वाली टेलीग्राम आईडी बीजिंग से संचालित की जा रही थी और नकली अमेजन साइट में निवेश करने के लिए पीड़ित को धोखा देने के लिए इस्तेमाल किया गया व्हाट्सएप नंबर भी भारत के बाहर से संचालित किया जा रहा था। पुलिस ने तब एनपीसीआई और कोटक महिंद्रा बैंक को एक ईमेल लिखा था, जिसमें संदिग्ध लेनदेन के लाभार्थी विवरण मांगे गए थे और यह पता चला था कि पीड़ितों से पैसे जमा करने के लिए एक शेल फर्म खाते का इस्तेमाल किया गया था।
एक ही दिन में 5.17 करोड़ रुपए जमा किए-
डीसीपी ने कहा कि बैंक से प्राप्त विवरणों की जांच के दौरान यह पाया गया कि एक ही दिन में कुल 5.17 करोड़ रुपये जमा किए गए। आगे की मनी ट्रेल में, यह पता चला कि पूरी राशि को 7 अलग-अलग फर्मो के माध्यम से आगे बढ़ाया गया था। क्रिप्टो करेंसी के जरिए विदेशी खातों में पैसा डाला गया है।"
अधिकारी ने कहा कि तकनीकी जांच आखिरकार उन्हें सतीश यादव तक ले गई, जिन्होंने एक अन्य आरोपी गर्ग के नाम का खुलासा किया। तीसरे आरोपी महला को तब गिरफ्तार किया गया था, जब उसका खाता रेजरपे के माध्यम से विदेश में बैठे एक जालसाज को पैसे निकालने में शामिल पाया गया था।
असली की तरह बनाई जाती थी नकली वेबसाइट-
डीसीपी ने कहा कि नकली वेबसाइटें इस तरह से बनाई जाती हैं कि वे वास्तविक अमेजन वेबसाइटों की तरह दिखाई देती हैं और कोई भी आसानी से धोखा खा सकता है। वेबसाइटें आमतौर पर चीन से विकसित की जाती हैं। पुलिस के अनुसार, उम्मीदवारों/नौकरी चाहने वालों को लुभाने के लिए इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अच्छी कमाई के पोस्ट के साथ प्रचार किया जा रहा है और उन्हें डिजिटल मार्केटिंग के माध्यम से लाखों लाइक और रेटिंग और समीक्षाएं मिलती हैं।
नकली स्क्रीनशॉट से बेरोजगारों को भरोसे में लेते थे-
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग उन्हें स्क्रीन पर ऑनलाइन नौकरी या घर से काम करने वाले लोगों के सामने पॉप अप करने के लिए भी किया जाता है। स्कैमर्स व्हाट्सएप के माध्यम से पीड़ितों तक स्वचालित रूप से पहुंचते हैं या कुछ मामलों में पीड़ित स्वयं संपर्क करते हैं। पीड़ितों को अच्छे पैसे कमाने वाले कर्मचारियों के साथ व्हाट्सएप चैट के नकली स्क्रीनशॉट और अच्छी तरह से तैयार की गई रचनात्मक चैट से आश्वस्त किया जाता है।
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