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हिनोतिया आलम में कॉलोनाइजर्स ने बेच दी करोड़ों की 17.5 एकड़ निष्क्रांत जमीन

भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समयजमीन पर कोई नहीं था हकदार। ईओडब्ल्यू ने दर्ज की एफआइआर

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हिनोतिया आलम में कॉलोनाइजर्स ने बेच दी करोड़ों की 17.5 एकड़ निष्क्रांत जमीन

हिनोतिया आलम में कॉलोनाइजर्स ने बेच दी करोड़ों की 17.5 एकड़ निष्क्रांत जमीन

भोपाल। हिनोतिया आलम और ग्राम चूनाभट्टी में सरकारी जमीन की खरीदी-बिक्री को लेकर आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने एफआइआर दर्ज की है। एफआईआर में हिनोतिया आलम की 17.5 एकड़ वह जमीन भी आरोपियों ने बेच दी जो निष्क्रांत (अनक्लेम्ड) भूमि थी। भारत-पाकिस्तान बंटवारे के दौरान इस जमीन का कोई भी हकदार नहीं था, इसलिए अलग-अलग गृह निर्माण सहकारी समितियां बनाई और कूटरचित कागज तैयार कर जमीन बेच दी गई।

इस जमीन की अरबों रुपए कीमत है। यह जानकारी ईओडब्ल्यू द्वारा जारी प्रेस नोट में दी गई है। वहीं, चूनाभट्टी में भी इसी तरह की जमीन का डायवर्शन और अनुमतियां लेकर सरकारी जमीन भी बेच दी। दोनों ही जगह की बेशकीमती जमीन की खरीद-फरोख्त से जहां शासन को करोड़ों रुपए का स्टांप ड्यूटी चुराकर नुकसान पहुंचाया गया है, वहीं सरकारी जमीन पर मकान तान दिए गए हैं। ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों ही जगह की जमीन का सौदा करने में न्यू कृषि नगर गृह निर्माण सहकारी संस्था और इसके अध्यक्ष श्यामनाथ शर्मा की अहम भूमिका है। चूनाभट्टी की 103/11,111/11/4/1 का अंश भाग अलग-अलग लोगों को बेची गई है। जांच में पता चला है कि चूनाभट्टी में कॉलोनाइजर्स ने मिलकर सरकारी जमीन का सौदा किया है। इन्होंने नगर तथा ग्राम निवेश से जितनी जमीन पर अनुमतियां ली, उससे अधिक जमीन पर निर्माण कर बेच दी। ईओडब्ल्यू ने केस दर्ज कर सभी को आरोपी बना लिया है। ईओडब्ल्यू ने प्रेसनोट जारी कर बताया है कि आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर प्रकरण को जांच में ले लिया है।

इन्हें बनाया गया आरोपी
श्यामनाथ शर्मा, आत्मज एसएन शर्मा, रामनाथ शर्मा, पुत्र एसएन शर्मा, एसएन शर्मा पुत्र जानकीनाथ शर्मा और कुसुम शर्मा पत्नी अश्विनी शर्मा अरेरा कॉलोनी। इन्होंने अलग-अलग लोगों से अनुबंध करके जमीन पर निर्माण कर बेचा। ईओडब्ल्यू को यह भी पता चला है कि मुख्तयार आम राकेश मलिक जगप्रवेश मलिक के नाम पर पावर ऑफ अटॉर्नी बताकर खसरा नंबर 9/4 और 9/5 की जमीन कई लोगों को बेच दी। बेची गई जमीन की रजिस्ट्री में यह नहीं बताया गया है कि यह जमीन कब और किससे इन्होंने खरीदी है। बेची गई जमीन के दस्तावेजों में रकबा का उल्लेख ही नहीं किया है। यह तरीका स्टांप चोरी के लिए अपनाया गया।

कूटरचित दस्तावेज बनाए
ईओडब्ल्यू की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने जमीन के सौदे के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार किए है। किसानों के नाम पर जमीन दर्शाने वाले कागज भी तैयार किए। आरोपियों ने अलग-अलग गृह निर्माण सहकारी समितियां बनाकर वारदात की। कम जमीन पर निर्माण संबंधी अनुमतियां-डायवर्शन लेकर मौके पर मौजूद सरकारी जमीन भी बेच दी। हिनोतिया आलम में तो निष्क्रांत भूमि तक बेच दी गई।

- कभी किसानों की, कभी सरकारी और कभी निष्क्रांत बताई गई, बाद में काट दिए प्लॉट
- 2002 से 2016 के बीच में किए गए सौदों के कागजों को माना आधार
- जांच में सामने आई मिलीभगत, सरकारी अमला, किसान और बिल्डरों ने मिलकर किया सौदा