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एमपी के तीन जिलों के कर्मचारियों, अधिकारियों को 42 हजार का नुकसान, नहीं मिलेगा भत्ता

MP Employees News- कर्मचारियों को नक्सल भत्ते का नुकसान, वन एसीएस ने किया इंकार

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Employees in three districts of MP to lose allowances worth 42 thousand

वन कर्मचारियों को 42 हजार के नक्सल भत्ते का नुकसान

MP Employees News- मध्यप्रदेश के तीन जिलों के कर्मचारियों, अधिकारियों को हजारों रुपए का नुकसान हो गया है। प्रदेश के वन अमले को यह नुकसान हुआ है। उनके लिए घोषित किया गया नक्सल भत्ता अब नहीं मिलेगा। प्रदेश के नक्सल मुक्त हो जाने के कारण बालाघाट, मंडला और डिंडौरी जिलों के वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों को यह भत्ता देने से इंकार कर दिया गया है। सीएम मोहन यादव ने नक्सली क्षेत्रों के वन अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष भत्ता देने के निर्देश दिए थे। इसपर प्रस्ताव बनाकर फाइलें बढ़ाई तो वन विभाग के एसीएस अशोक बर्णवाल यह कहकर लौटा दीं कि चूंकि प्रदेश अब नक्सल मुक्त हो चुका है इसलिए अतिरिक्त भत्ते की अब कोई जरूरत नहीं हैं।

20 जून 2025 को वन विभाग की समीक्षा बैठक में सीएम मोहन यादव ने नक्सल प्रभावित जिलों में वन अमले की हौसला अफजाई के लिए पौष्टिक आहार भत्ता और विशेष भत्ता देने के निर्देश दिए थे। उन्होंने वन सुरक्षा में उल्लेखनीय योगदान पर आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देने की भी बात कही थी।

वनपालों को वार्षिक 42 हजार रुपए का प्रस्ताव था

सीएम मोहन यादव के निर्देश पर वन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कराकर सरकार को भेज दिए। विभाग ने प्रस्ताव में नक्सल प्रभावित तीनों जिलों में पदस्थ कर्मचारियों को नक्सल भत्ता देने की बात कही। बताया जा रहा है कि वनपालों को 3500 रुपए प्रति माह यानि वार्षिक 42 हजार रुपए का प्रस्ताव था। इसी तरह वनरक्षकों को हर माह 2700 रुपए के हिसाब से 32 हजार 400 रुपए वार्षिक राशि देने का प्रस्ताव बनाया गया था। नक्सल भत्ता की राशि मासिक वेतन के अतिरिक्त देय थी।

एसीएस अशोक बर्णवाल ने फाइल लौटा दी

वन विभाग के एसीएस अशोक बर्णवाल के पास जब ये प्रस्ताव मंजूरी के लिए आए तो उन्होंने तुरंत फाइल लौटा दी। उन्होंने लिखा कि मध्यप्रदेश अब पूरी तरह नक्सल मुक्त घोषित हो चुका है। जब कोई जिला नक्सल प्रभावित बचा ही नहीं है तो अतिरिक्त भत्ता देने का भी कोई औचित्य नहीं हैं। बता दें कि नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस कर्मियों को नक्सल भत्ता मिलता था। वन कर्मचारी इसी आधार पर उन्हें भी नक्सल भत्ता देने की मांग कर रहे थे।