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भरत कालीचरण: ऐसा सीरियल रेपिस्ट, जिसे महिलाओं की भीड़ ने जज के सामने मार डाला, काटकर अलग कर दिया प्राइवेट पार्ट

Crime News: भरत कालीचरण उर्फ अक्कू यादव पर करीब 200 महिलाएं मिर्च पाउडर और पत्थर लेकर उस पर टूट पड़ीं।

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Crime News: कहा जाता था कि कस्तूरबा नगर में घर दूसरे घर में उसकी शिकार महिला है।

Crime News: हाल के समय में पूर्व सांसद अतीक की पुलिस कस्टडी में तो गैंगेस्टर संजीव जीवा की कोर्टरूम में हत्या किए जाने का मामला खूब चर्चा में रहा है। दोनों मामलों में हमलावरों ने अचानक गोलियां बरसाकर हत्या की लेकिन देश में एक केस ऐसा भी है, जहां कोर्टरूम में हत्या नहीं लिंचिंग हुई थी। करीब 300 महिलाएं एक कैदी पर टूट पड़ी थीं और उसको तब तक मारा था, जब तक वो मर नहीं गया। ये मरने वाला शख्स था सीरियल रेपिस्ट और किलर था भरत कालीचरण, जिसे अक्कू यादव के नाम से भी जाना जाता है।

नागपुर के कोर्ट में मार डाला गया था अक्कू
भरत कालीचरण को 13 अगस्त, 2004 को नागपुर जिला कोर्ट में पेश किया गया था। कालीचरण पर रेप, मर्डर, चोरी, गैंगवार के दर्जनों मुकदमे थे। पहले भी भरत को कुछ मामलों में बेल मिली थी, ऐसे में एक अफवाह उड़ी हुई थी कि उसे फिर से बेल मिल जाएगी। इधर कालीचरण को कोर्ट लाया गया और दूसरी तरफ उसकी ही बस्ती कस्तूरबा नगर की करीब 300 महिलाएं कोर्ट पहुंच गईं। महिलाओं ने उसको गालियां दीं तो उसने पलटकर अपशब्द कहे। पुलिस उसे कोर्ट के भीतर ले गई लेकिन महिलाओं ने दरवाजा तोड़ दिया और पत्थरों से उस पर हमला बोल दिया।

करीब 200 महिलाएं इतनी बुरी तरह से कालीचरण पर टूट पड़ीं कि पुलिस बेबस हो गई। महिलाओं ने पत्थरों, चाकुओं और इसी तरह की कई चीजों से सैकड़ों वार कालीचरण पर किए। उसका चेहरा बुरी तरह से कूच डाला और उसका निजी अंग भी गुप्तांग काट दिया।

1991 में पहली बार अपराध में आया नाम और फिर बन गया खौफ का दूसरा नाम
भरत कालीचरण 1971 में महाराष्ट्र के नागपुर के कस्तूरबा नगर ना की झुग्गी बस्ती में पैदा हुआ। पहली बार साल 1991 में उस पर एक गैंगरेप में शामिल होने का आरोप लगा। धीरे-धीरे वो कस्तूरबा नगर में औरतों के लिए खौफ का दूसरा नाम बन गया। उस पर कस्तूरबा नगर की कई महिलाओं का रेप करने का आरोप लगा। कई उसके डर से चुर रह जाती, जो शिकायत की बात कहती उसे मार डालता। उसके बारे में कहा जात कि वो हत्या के बाद लाश को रेल की पटरियों पर फेंक देता था।

कालीचरण का खौफ कस्तूरबा नगर की औरतों में इतना बढ़ गया कि 2004 में सैकड़ों महिलाएं ये कहते हुए उस पर टूट पड़ीं कि ये जिंदा रहेगा तो हम नहीं बचेंगे। ऐसे में हमारा कुछ भी हो लेकिन इस दरिंदे को नहीं छोड़ना है और उसको मार डाला गया।

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