
गुजरातः गिरफ्तारी वारंट पाकर फूला नहीं समाया, घरवालों का आशीर्वाद लेकर झूमते-नाचते पहुंचा जेल
अहमदाबाद। यूं तो पुलिस के नाम से ही लोग डर जाया करते हैं और जब मामला वारंट या जेल जाने का हो, तो अच्छे-अच्छों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है। लेकिन गुजरात के वडोदरा में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर अच्छे-अच्छों को हंसी आ जाएगी। मामला एक व्यक्ति के गिरफ्तारी वारंट से जुड़ा है, जिसके बाद वो आदमी बहुत खुश हुआ। जश्न मनाते हुए वो थाने पहुंचा और अपने मां-बाप से आशीर्वाद लेकर जेल गया।
पुलिस की मानें तो वडोदरा में रहने वाले हेमंत राजपूत की शादी सुनीता से हुई थी। शादी के बाद दोनों में इस बात को लेकर झगड़ा शुरू हो गया कि घर से अलग रहा जाए। सुनीता चाहती थी कि वो दोनों दूसरे घर में जाकर रहने लगें। लेकिन हेमंत इस बात के लिए राजी नहीं था। दोनों के बीच आए दिन खटपट होने लगी और आखिर में सुनीता मायके चली गई। इतना ही नहीं सुनीता ने मायके पहुंचने के बाद फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दायर कर दी और हेमंत से भरण-पोषण लेने का भी मुकदमा ठोक दिया।
अदालत ने हेमंत को हुक्म सुनाया कि वो सुनीता को प्रतिमाह 3,500 रुपये गुजारा भत्ता दे। हालांकि हेमंत ने यह भत्ता नहीं दिया। बढ़ते-बढ़ते यह रकम 95 हजार रुपये से ज्यादा हो गई और सुनीता की शिकायत पर अदालत ने रिकवरी के लिए फिर से जल्द रकम चुकाने का आदेश दे दिया। इसके बाद भी हेमंत ने एक भी पैसा नहीं दिया। इस पर अदालत ने हेमंत के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर पुलिस सेे उसे पकड़ने के लिए कहा।
रविवार को स्थानीय बापोड पुलिस हेमंत का गिरफ्तारी वारंट लेकर उसके घर गई। हेमंत घर पर नहीं था इसलिए पुलिस ने परिजनों से कहा कि जैसे ही वो आए उसे थाने भेज दें। जब हेमंत घर पहुंचा तब उसे इसकी जानकारी हुई। सोमवार सुबह हेमंत के दोस्तों ने उसके घर पहुंचकर जश्न मनाया और उसे फूल-मालाएं पहनाईं। इतना ही नहीं, दोस्तों ने उसे कंधों पर बिठाया और परिवार के साथ उसे लेकर नाचते-गाते हुए पुलिस थाने पहुंच गए। पुलिस थाने के बाद हेमंत, उसके परिजन, दोस्त-पड़ोसी पूरी प्रसन्नता के साथ पहुंचे।
यह सब तमाशा देखने के लिए आसपास भीड़ जमा हो गई। शोर-शराबा सुनकर पुलिसवाले बाहर निकले तो यह नजारा देखकर सन्न रह गए। थाने के बाहर हेमंत ने अपने दोस्तों को गले लगाया। अपने मां-बाप-रिश्तेदारों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और फिर गर्व से थाने के भीत जाकर खुद को पुलिस के हवाले कर दिया। शायद पहला ऐसा मौका रहा होगा जब अपने बच्चे को गिरफ्तार होते देख घरवाले मायूस होने के बजाय खुश दिखे।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने हेमंत को अदालत में पेश किया, जहां से उसे 270 दिनों के लिए जेल भेज दिया गया। हेमंत का कहना है कि सुनीता ने उसे और उसके मां-बाप को मानसिक रूप से परेशान किया है। इसके चलते उसे जेल जाने में कोई दिक्कत नहीं, लेकिन सुनीता को एक भी पैसा देना उसे मंजूर नहीं। हेमंत की मानें तो सुनीता उससे कहीं ज्यादा कमाती है और अस्पताल में नौकरी करती है। उसे गुजारा भत्ता की कोई जरूरत नहीं।
Published on:
16 Oct 2018 03:29 pm

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