ऑनलाइन ठगी का जामताड़ा मॉडलः राजस्थान का भरतपुर भी नक्शे कदम पर

  • साइबर क्राइम की दुनिया में ई-सिम फ्रॉड ने मचाई सनसनी।
  • झारखंड के जामताड़ा मॉडल को अपनाकर कई स्थानों पर ठग सक्रिय।
  • पुलिस के पास वो टेक्निक नहीं है जो फिशिंग को ट्रेस कर सके।

प्रेम कुमार/नई दिल्ली। ऑनलाइन ठगी के ‘जामताड़ा मॉडल’ ने ई-सिम फ्रॉड को जन्म देकर साइबर क्राइम की दुनिया में हलचल मचा दी है। हरियाणा की फरीदाबाद पुलिस ने अगस्त महीने में जिन पांच लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया है उनमें से चार जामताड़ा के हैं। इन्होंने माना है कि 300 से ज्यादा लोगों के अकाउंट पर ये हाथ साफ कर चुके हैं।

सिम कार्ड यानी सब्सक्राइबर आइडेंटिटी मॉड्यूल भौतिक रूप से महसूस किया जाने वाला कार्ड होता है। इसमें कस्टमर का सारा ब्योरा होता है। मगर, ई-सिम कार्ड को आप देख, छू या महसूस नहीं कर सकते। यह सिम कार्ड का इलेक्ट्रॉनिक रूप होता है। यह टेलीकॉम नेटवर्क पर रजिस्टर कराकर हासिल किया जाता है। उदाहरण के लिए टीवी के पुराने सेट टॉप बॉक्स में सिम कार्ड लगा करता था, मगर अब जो नए सेट टॉप बॉक्स आ रहे हैं उनमें बस आइडी और पासवर्ड डालने की जरूरत होती है सिमकार्ड नहीं। वास्तव में यहां ई-सिम कार्ड काम कर रहा होता है।

फोन नंबर मिलते ही एक्टिव हो जाता है गिरोह

फ्रॉड करने वाले लोग किसी तरीके से आपका ई-सिम एक्टिवेट करवा लेते हैं। इसके लिए जानकारी आपसे ही लेते हैं। ये लोग पहले मोबाइल नंबर पता करते हैं। उसे बैंकिंग एप्लीकेशन में ट्राई करते हैं। जैसे ही पासवर्ड मांगा जाता है बस उन्हें टारगेट मिल जाता है।

ऑनलाइन ठगी में देश का दूसरा जामताड़ा बन रहा मेवात

वे कस्टमर केयर वाला बनकर केवाईसी अपडेट कराने या ऐसे ही किसी नाम पर आपसे बातचीत करते हैं और बहाने से आपका ई-मेल हासिल कर लेते हैं जो बैंक में रजिस्टर है। फिर कस्टमर केयर से ई-मेल आइडी बदलने का रिक्वेस्ट भेज देते हैं। नई ई-मेल आईडी से वे टेलीकॉम ऑपरेटर को आपके सिम को ई-सिम में बदलने का आग्रह कर लते हैं। ऐसा होते ही आपका ईमेल और सिम दोनों फ्रॉड करने वालों के हाथ में आ जाता है।

न्यू जामताड़ाः 80 फीसदी मामले तीन शहरों से जुड़े

गुड़गांव में लॉकडाउन के दौरान साइबर क्राइम के दोगुने मामले देखने को मिले हैं। आश्चर्य की बात ये है कि बीते एक साल में साइबर क्राइम के 80 फीसदी मामले तीन शहरों से जुड़े रहे हैं और ये तीनों शहर तीन राज्यों की सीमा में हैं और एक-दूसरे के करीब भी।

हरियाणा का मेवात, राजस्थान का भरतपुर और उत्तर प्रदेश का मथुरा वास्तव में गुरुग्राम में साइबर क्राइम का ट्राइ-जंक्शन बन चुका है जिसे न्यू जामताड़ा नाम दिया गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में जनवरी से जून तक 6 महीने में गुरुग्राम में 3446 ऑनलाइन ठगी के मामले सामने आए थे। 2020 इन्हीं महीनों में ऐसे मामलों की संख्या 5779 हो चुकी है।

मनोरम कहानी नहीं, माथा पकड़ने वाला किस्सा

फ्रॉड करने का ये तरीका अलग-अलग क्षेत्र, अलग पेशे के लोग और विभिन आयु वर्ग में अलग-अलग होता है। उदाहरण के लिए यह कोरोना काल है। घर से बाहर निकलने पर तरह-तरह की पाबंदी है। ऐसे में सस्ते में मोबाइल रीचार्ज कराने के नाम पर या फिर फ्री की थाली या सस्ती थाली जैसे प्रलोभनों के साथ ठगी करना अधिक आसान होता है।

साइबर ठग सक्रिय: फ्रेंडशिप और कोविड-19 में मदद वाले मैसेज से झांसा देकर ठगी

किसी घटना से जुड़ी पूरी वारदात को सुनकर आपको ऐसा लगेगा जैसे कोई मनोरम कहानी सुन रहे हों। मगर, ठगे गए लोगों के लिए यह माथा पकड़ने वाला किस्सा होता है तो ठगों को पकड़ने और गिरोह का भांडा फोड़ने की चुनौती पुलिस के लिए सिरदर्द होता है।

12 सितंबर को रायपुर पुलिस ने जामताड़ा से सटे गांवों में छापेमारी कर दो युवकों को गिरफ्तार किया। एक ने रायपुर के आरडीए बिल्डिंग में रहने वाले व्यक्ति के खाते से 1 लाख 10 हजार रुपये उड़ा लिए थे, दूसरे ने अभनपुर के भागीरथी सिन्हा को 1 लाख 10 हजार रुपये की चपत लगा दी थी।

पहले मामले में कारोबारी को पार्सल महाराष्ट्र भेजना था। उन्होंने इंटरनेट से बड़ी कुरियर कंपनी का नंबर ढूंढ़कर निकाला और कॉल किया। ये नंबर इन ठगों का ही था। ठगों ने उनसे कंपनी का अफसर बनकर बात की और मैसेंजर पर लिंक भेजकर 5 रुपये का रीचार्ज करने को कहा। रीचार्ज होते ही खाते का ब्योरा ठगों के पास पहुंच चुका था। फिर ऑनलाइन ट्रांसफर कर उसने सारी रकम ट्रांसपर कर ली। अभनपुर के भागीरथी सिन्हा को गाड़ी की फ्री सर्विसिंग करानी थी और इस गिरोह के चक्कर में फंस गए।

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2020 में जामताड़ा में आईसीआईसीआई बैंक में धोखाधड़ी के 70 से ज्यादा शिकायतें

2020 में आईसीआईसीआई के अकाउंट से धोखाधड़ी के 70 से ज्यादा मामलों के तार जामताड़ा से जुड़े मिले, जिनमें 1 करोड़ 12 लाख की ठगी की गई थी। 31 मई को पुलिस ने 8 ठगों को गिरफ्तार किया और अब तक कुल 16 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें विधानसभा चुनाव लड़ चुका अनवर अंसारी भी शामिल था। देवघर साइबर थाना ने इस मामले में सफलता हासिल की है और पूरे रैकेट का भंडाफोड़ किया है।

क्या कहते हैं साइबर क्राइम विशेषज्ञ

साइबर क्राइम विशेषज्ञ संदीप दुबे बताते हैं कि देश में ऐसे फ्रॉड से निपटने के लिए कानून की कमी नहीं है। फिशिंग को रोकने के लिए आईपीसी की धारा 415 और 420 है। आईटी एक्ट अलग से है। असल बात ये है कि ये फ्रॉड जितने तकनीकी रूप से सक्षम हैं उन्हें पकड़ने के लिए उतना ही सक्षम साइबर क्राइम थानों को भी बनाना होगा। पुलिस के पास वो टेक्निक नहीं है जो फिशिंग को ट्रेस कर सके। नतीजा यह है कि जो ठगी के शिकार होते हैं वे बाद में परेशानी के शिकार हो जाते हैं।

(प्रेम कुमार स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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अमित कुमार बाजपेयी
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