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Durg Mayor Controversy: महापौर अलका बाघमार पर 3 अफसरों को “बंधक” बनाने का आरोप, पुलिस ने कराया रिहा

Durg Mayor Controversy: दुर्ग नगर निगम में उस समय हड़कंप मच गया जब महापौर अलका बाघमार पर तीन अधिकारियों को अपने केबिन में रोककर “बंधक” बनाने जैसे गंभीर आरोप लगे।

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Durg Mayor Controversy

महापौर पर तीन अफसरों को रोकने का आरोप (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Durg Mayor Controversy: नगर निगम दुर्ग में महापौर और अफसरों के बीच चल रही तनातनी शुक्रवार को उस वक्त चरम पर पहुंच गई जब महापौर अल्का बाघमार के केबिन में तीन अधिकारियों को कथित रूप से घंटों बैठाए रखने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। असहज हुए अफसरों की सूचना पर एएसपी, सीएसपी समेत दो थानों की टीम निगम पहुंची और तीनों को दोपहर करीब साढ़े तीन बजे केबिन से बाहर निकाला।

Durg Mayor Controversy: जानें पूरा मामला

विवाद की शुरुआत एक दिन पहले गुरुवार को उरला के एक स्कूल में अतिरिक्त कक्ष के भूमिपूजन कार्यक्रम से हुई। इस भूमिपूजन कार्यक्रम की सूचना महापौर को देर से मिली। जिसके कारण शिक्षामंत्री गजेंद्र यादव की मौजूदगी में हुए भूमिपूजन कार्यक्रम में महापौर देर से पहुंची। इससे वह बेहद नाराज थी। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर ही मंच से अधिकारियों को जमकर खरीखोटी सुनाई थी।

बिना एनओसी के सड़क निर्माण से खफा

शुक्रवार को साइंस कॉलेज के पीछे नहर किनारे सड़क निर्माण की जानकारी मिलने पर महापौर का गुस्सा और बढ़ गया। बताते हैं इस सड़क निर्माण के लिए मंत्री गजेंद्र यादव ने राशि स्वीकृत कराई है। इस सड़क निर्माण का काम पीडब्ल्यूडी को दिया गया है। जहां नहर किनारे सड़क बनाया जाना है वह जमीन जलसंसाधन विभाग की है।

सड़क निर्माण के लिए जलसंसाधन विभाग से अभी एनओसी नहीं मिला है। इधर बिना एनओसी के सड़क निर्माण का काम शुरू कर दिया गया है। जिसकी महापौर को जनकारी नहीं थी। शुक्रवार को जब इसकी जानकारी हुई तो महापौर बिफर गई। उन्होंने जल संसाधन, पीडब्ल्यूडी, आरईएस आदि के जिम्मेदार अधिकारियों को अपने कार्यालय में बुलाया।

गार्ड से दरवाजा बंद करवा दिया

महापौर के बुलावे पर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) के ईई जेके मेश्राम, एसडीओ सीके सोने और मंडी बोर्ड के एसडीओ प्रवीण पांडे पहुंचे। बाकी अधिकारी नहीं आए। बताया जाता है कि महापौर ने अधिकारियों से पूछा कि शहर में होने वाले निर्माण कार्यों के भूमिपूजन -लोकार्पण की सूचना उनको क्यों नहीं दी जाती। महापौर यह जानना चाहतीं थी कि आखिर किसके कहने पर उनकी अनदेखी की जा रही है।

बताया जाता है कि जब अधिकारियों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो महापौर का गुस्सा और बढ़ गया उन्होंने चिल्लाते हुए कहा कि जब तक सही जवाब नहीं मिलेगा, तब तक कोई भी केबिन से बाहर नहीं जाएगा, चाहे देर रात क्यों न हो जाए। महापौर ने अपने गार्ड को भी निर्देश दिया कि किसी भी अधिकारी को बाहर जाने न दिया जाए। महापौर के कहने पर गार्ड ने दरवाजा बंद कर दिया। इससे तीनों अधिकारी असहज हो गए।

असहज अधिकारी कहते रहे अब ऐसा नहीं होगा

बताते हैं कि कक्ष की स्थिति से असजह होकर अधिकारी बार-बार कहने लगे कि अब ऐसा नहीं होगा। हर कार्यक्रम की सबसे पहले सूचना आपको दी जाएगी, लेकिन महापौर जानना चाहतीं थी कि किसके इशारे पर उनको समय पर सूचना नहीं दी जा रही है। बताते हैं वहां स्थिति बेहत तनावपूर्ण हो गई थी। अधिकारियों को फोन भी नहीं करने दिया जा रहा था। इसी दौरान एक अफसर ने चुपके से पुलिस को सूचना दी।

सूचना पर बल के साथ पहुंचे पुलिस अधिकारी

सूचना मिलते ही एएसपी सुखनंदन राठौर, सीएसपी हर्षित मेहर, टीआई नवीन सिंह राजपूत और राजकुमार लहरे पुलिस बल के साथ निगम कार्यालय पहुंचे। पुलिस ने तीनों अफसरों को सुरक्षा के साथ बाहर निकाला।

अल्का बाघमार, महपौर नगर निगम दुर्ग के मुताबिक, किसी को बंधक नहीं बनाया गया, अधिकारियों को मैंने खुद बुलाया था। किसने पुलिस को फोन कर दिया, मुझे यह नहीं मालूम। पुलिस के अधिकारी आकर खुद देखकर गए हैं। मेरे कक्ष में मीटिंग चल रही थी।

राजकुमार लहरे, टीआई पद्मनाभपुर थाना के मुताबिक, महापौर के केबिन में तालाबंद करने की सूचना पर निगम पहुंचे। जहां अधिकारी और कुछ अन्य लोग बैठे मिले। बंधक बनाने वाली कोई लिखित शिकायत नहीं हुई। कानून व्यवस्था को देखते हुए मौके पहुंचे थे।