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जम्मूः स्वतंत्रता दिवस से पहले फूले पुलिस के हाथ-पांव, रोहिंग्या की झुग्गी से मिले 30 लाख नगद

15 अगस्त से कुछ दिन पहले ही मिली यह बड़ी रकम किस मकसद से यहां पहुंचाई गई थी, पुलिस इसे लेकर कड़ी जांच में जुट गई है।

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Rohingya Muslims Jammu

Rohingya Jammu

जम्मू। स्वतंत्रता दिवस से पहले जम्मू-कश्मीर में पुलिस के हाथ एक बड़ी कामयाबी लगी है। घाटी में तीन रोहिंग्या मुसलमानों की झुग्गी की तलाशी के दौरान पुलिस उस वक्त हैरान रह गई जब वहां से 30 लाख रुपये की नगदी बरामद हुई। मामला जम्मू स्थित चन्नी हिम्मत नामक स्थान का है। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी जिसके बाद छापेमारी की कार्रवाई हुई। 15 अगस्त से कुछ दिन पहले ही मिली यह बड़ी रकम किस मकसद से यहां पहुंचाई गई थी, पुलिस इसे लेकर कड़ी जांच में जुट गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस पूछताछ में इन तीनों रोहिंग्याओं ने कबूला कि यह नूर आलम (21) और इस्माइल (19) नामक व्यक्तियों का है। यह दोनों शख्स रकम देने के बाद कुछ दिन पहले बांग्लादेश निकल गए थे। हालांकि दोनों यह बताने में नाकाम रहे कि कैसे दोनों व्यक्ति बिना वैध वीजा के बांग्लादेश चले गए। यह रोहिंग्या युवक बीते तकरीबन छह वर्षों से जम्मू में रह रहे थे।

फाइल फोटो IMAGE CREDIT:

पुलिस को चन्नी हिम्मत नामक इलाके की एक झुग्गी से 30 रुपये की नगदी बरामद हुई। इनमें 27 लाख रुपये की रकम 2,000 और 500 रुपये की नई करेंसी नोटों के रूप में बरामद हुई जबकि बाकी के तीन लाख रुपये कम मूल्य वाले नोटों के रूप में मिली। पुलिस के सामने यह पहला मामला आया है जिसमें म्यांमार से घाटी में आए किसी रोहिंग्या परिवार के पास सेे इतनी भारी मात्रा में नगदी बरामद की गई है। सामान्य तौर पर देश में रोहिंग्या मुसलमान छोटे-मोटे धंधे करते हैं।

पुलिस को यह रकम प्लास्टिक के बड़े कंटेनर में भरे कबाड़ के नीचे रखे एक सूटकेस में मिली। सामान्यतौर पर कोई व्यक्ति इस कबाड़ के भीतर ऐसे रकम छिपाई जा सकती है, सोच भी नहीं सकता। इतनी बड़ी रकम बरामद होने के बाद पुलिस अलग-अलग थ्योरी पर काम करने में जुट गई है। इसमें स्वतंत्रता दिवस से पहले इतनी बड़ी रकम पहुंचने का मकसद, आतंकी गतिविधियों के लिए हवाला की रकम, म्यांमार से मानव तस्करी, ड्रग्स, चोरी या पड़ोसी मुल्क से की जा रही फंडिंग जैसे मामले हो सकते हैं।

गौरतलब है कि घाटी में रोहिंग्या मुसलमानों की बढ़ती आबादी के बाद तमाम संगठनों-संस्थाओं ने इन्हें निर्वासित किए जाने की मांग उठाई है। इनमें जम्मू चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और जम्मू एंड कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी भी शामिल हैं। इन्हें देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा बताया गया है।