
दबिश देकर लौट रहे थे 'CBI अधिकारी' और पहुंच गई पुलिस, फिर सच्चाई जानकर पैरों तले खिसक गई जमीन
तिरुवनंतपुरम। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की अदालत ने मंगलवार को 2005 में पुलिस हिरासत में हुई 27 वर्षीय युवक की मौत के मामले में सभी छह पुलिस अधिकारियों को दोषी पाया है। उदयकुमार नामक इस युवक को पुलिस ने चोरी के आरोप में हिरासत में लिया था।
सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश जे नसीर का यह आदेश घटना के 13 साल बाद आया है। अदालत एक-दो दिनों में दोषी पुलिसवालों को सजा सुना सकती है। वहीं, दोषी 6 पुलिसवालों में से एक की सुनवाई के दौरान मौत भी हो चुकी है।
पुलिस के मुताबिक 27 सितंबर 2005 को तिरुवनंतपुरम के फोर्ट थाने की पुलिस ने 27 वर्षीय उदयकुमार और उसके दोस्त सुरेश को श्रीकांतेश्वरम पार्क से इसलिए उठाया क्योंकि उनके पास से उन्हें 4,500 रुपये मिले थे। दोनों पर चोरी करने का आरोप लगाते हुए पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। पुलिस ने विशेषरूप से उदयकुमार को शारीरिक रूप से ज्यादा पीटा ताकि वो जुर्म कबूल ले।
कथितरूप से उदयकुमार के पैरों पर जमकर लाठियां बरसाई गईं और उसकी जांघों के ऊपर भारी लोहे की रॉड चलाई गई। पुलिस की पिटाई से हुई उसकी मौत को स्थानीय मीडिया द्वारा 'उरुत्ती कोला' कहा गया। इस घटना से न केवल पुलिस द्वारा अपनाए जाने वाले थर्ड डिग्री टॉर्चर का खुलासा हुआ, बल्कि तत्कालीन सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार को भी काफी बदनामी का सामना करना पड़ा था।
बीते 13 वर्षों के दौरान पहले पुलिस द्वारा की गई जांच और फिर सीबीआई जांच से इस मामले में कई उतार-चढ़ाव आए। इनमें प्रत्यक्षदर्शियों का विरोधाभासी होना और दस्तावेज में हेराफेर कर आरोपी पर डकैती की धारा लगाना भी शामिल रहा। हालांकि, मंगलवार को सीबीआई अदालत का फैसला उदयकुमार की मां प्रभावती के लिए काफी सुकून लाने वाला रहा, क्योंकि वो एक दशक से भी ज्यादा वक्त से मुकदमा लड़ रही थीं।
दोषी पुलिसवालों में 2005 में उदयकुमार को हिरासत में लेने वाले कॉन्सटेबल के जितुकुमार, एसवी श्रीकुमार, तत्कालीन सब इंस्पेक्टर टी अजीत कुमार, तत्कालीन सर्किल इंस्पेक्टर ईके साबू और तत्कालीन सहायक आयुक्त टीके हरिदास समेत कॉन्सटेबल केवी सोमन (मुकदमे के दौरान मौत हो गई) शामिल हैं।
Published on:
24 Jul 2018 03:36 pm
बड़ी खबरें
View Allक्राइम
ट्रेंडिंग
