
Supreme Court
नई दिल्ली. आंदोलनों और विरोध—प्रदर्शनों के दौरान भीड़ के उपद्रव से होने वाले नुकसान की भरपाई उसी राजनीतिक दल या संगठन को करनी होगी जिसके आह्वान पर लोग जमा हुए हों। सुप्रीम कोर्टने सोमवार को एक अहम फैसले में इससे संबंधित विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं।
रिटारमेंट से पहले आखिरी फैसले में प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय पीठ ने केरल की कोडुंगलूर फिल्म सोसायटी की जनहित याचिका पर यह फैसला सुनाया। याचिका निर्माता—निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावतके विरोध के दौरान करणी सेना के उपद्रव के संदर्भ में दायर की गई थी। कोडुंगलूर फिल्म सोसायटी ने भीड़ में शामिल असामाजिक तत्वों की हिंसा नियंत्रित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के 2009 के फैसले पर सरकारों को जिम्मेदार बनाने के लिए मानक तय करने का आग्रह किया था। कोर्ट ने अधिकारी नियुक्त कर नुकसान के आंकलन की भी बात कही है।
कोई कानून का स्वयंभू रक्षक नहीं बन सकता
सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुनाते हुए जस्टिस खानविलकरने कहा कि किसी को भी कानून का स्वयंभू रक्षक बनने या अपनी समझ से कानून को हाथ में लेने या हिंसा करने का हक नहीं है। पीठ ने कहा कि भीड़ की हिंसा हमारी न्याय व्यवस्था के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है और सरकारों की जिम्मेदारी है कि ऐसे समूहों की गैर-कानूनी हरकतों से नागरिकों की रक्षा करे। इसके साथ ही कोर्ट ने सरकारों के लिए दिशानिर्देश जारी किए। अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अदालत से आग्रह किया कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुचाने वाली ऐसी हरकतों के लिए जिम्मेदारी तय करने और नुकसान की भरपाई के लिए दिशनिर्देश तय किया जाएं।
शीर्ष अदालत दिए ये दिशा—निर्देश
कोर्ट ने निर्देश दिया कि राज्य सरकारें जिला स्तर पर ऐसा त्वरित प्रक्रिया दल बनाएं जो भीड़ की हिंसा से तुरंत निपटने में सक्षम हो। भीड़ को रोकने के लिए पानी की बौछार, आंसू गैस जैसे गैर-नुकसानदेह तरीकों के इस्तेमाल पर विचार किया जाए। सरकार द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी भीड़ को काबू में करने के लिए ऑडियो-विजुअल माध्यमों से संदेश भेजकर अफवाहों को रोकने का समन्वित प्रयास करें। संदेश प्रसारण के लिए सोशल मीडिया रेडियो, टीवी आदि का इस्तेमाल हो।
नुकसान पर इन नियमों के तहत हो कार्रवाई
कोर्ट ने कहा, संपत्ति को प्रत्यक्ष या परोक्ष नुकसान होने पर प्रदर्शन की अपील करने वाले समूह या संगठन या किसी व्यक्ति के खिलाफ आइपीसी की धारा 153 (ए), 295 (ए), 298 व 425 के तहत कार्रवाई की जाए। विरोध—प्रदर्शन के दौरान उपद्रव में नुकसान होने पर 24 घंटे के भीतर समूह/संगठन के नेता और अधिकारी संबंधित थाने में उपस्थित होकर पूछताछ में सहयोग करे। जान-माल की क्षति होने पर इसमें शामिल या भड़काने वाले गिरफ्तार व्यक्ति को हर्जाना देने के बाद जमानत पर छोड़ सकते हैं।
Updated on:
2 Oct 2018, 10:06 AM IST
Published on:
2 Oct 2018, 10:06 AM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.