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1996 बम ब्लास्ट: लश्कर के बम सप्लायर अब्दुल करीम टुंडा को उम्रकैद की सजा

सोनीपत की अदालत ने कल टुंडा को दिया था दोषी करार, साल 2013 में नेपाल बॉर्डप से हुई थी गिरफ्तारी
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Kapil Tiwari

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Updated: 10 Oct 2017, 12:30 PM IST

Tunda

सोनीपत: 1996 के बम धमाकों के आरोपी अब्दुल करीम टुंडा को सोनीपत की अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। आपको बता दें कि इससे पहले सोमवार को अदालत ने टुंडा को दोषी करार दिया था और सजा का ऐलान करने के लिए आज की तारीख रखी थी। लश्कर-ए-तैयबा का बम एक्सपर्ट माना जाने वाला आतंकी अब्दुल करीम टुंडा अगस्त 2013 में दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ा था। पुलिस ने उसे उत्तराखंड से सटे नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार किया था।

सिलसिलेवार रूप से हुए थे 2 धमाके
अब्दुल करीम टुंडा पर हरियाणा के सोनीपत में 1996 में हुए 2 बम धमाकों का आरोप लगा था। 2013 में गिरफ्तारी के बाद टुंडा पर इस मामले में सोनीपत की जिला अदालत में केस चला। अदालत में टुंडा के खिलाफ 4 लोगों ने गवाही दी। आपको बता दें कि अब्दुल करीम टुंडा पर सोनीपत में 28 दिसंबर, 1996 को हुए बम धमाकों का आरोपी था। ये बम धमाके बस स्टैंड के पास स्थित तराना सिनेमा के पास हुआ था, जबकि दूसरा धमाका दस मिनट बाद गीता भवन चौक पर गुलशन मिष्ठान भंडार के पास हुआ था। इन धमाकों में करीब 1 दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

1998 में टुंडा के साथी हुए थे गिरफ्तार
पुलिस ने इस संबंध में गाजियाबाद निवासी अब्दुल करीम टुंडा और उसके दो साथियों अशोक नगर पिलखुआ निवासी शकील अहमद और अनार वाली गली तेलीवाड़ा, दिल्ली निवासी मोहम्मद आमिर खान उर्फ कामरान को नामजद किया था। पुलिस ने शकील और कामरान को वर्ष 1998 में गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन टुंडा घटना के बाद से लंबे वक्त तक फरार रहा था।

2015 में एक अन्य मामले में हुआ था बरी
आपको बता दें कि इससे पहले मार्च 2015 में दिल्ली की एक कोर्ट ने टुंडा को साल 1994 में टाडा कानून के तहत दर्ज एक मामले में आरोपमुक्त कर दिया। 2008 के मुंबई आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से जिन 20 आतंकवादियों को उसे सौंपने के लिए कहा था, उसमें टुंडा भी शामिल था।

दिल्ली में ही जन्म था टुंडा
दिल्ली के दरियागंज इलाके में जन्म करीम टुंडा पिलखुवा में आठवीं क्लास तक पढ़ा था। इसके बाद वह अपने चाचा के पास मेरठ गया इस आस से कि पढ़ाई फिर शुरू हो सके, लेकिन यहां उसे काम में लगा दिया गया. उसकी मां को जब पता चला तो उन्होंने वापस पिलखुवा बुला लिया।

ऐसे बना था आतंकी
अयोध्या में बाबवी विध्वंस से पहले टुंडा पाकिस्तान गया था। वहां उसकी मुलाकात अपनी बीवी के भाई गयासुद्दीन से हुई थी, जिसने उसकी मुलाकात लश्कर ए तएबा के मुखिया कुख्यात आतंकवादी हाफिज सईद से कराई थी। इसके बाद टुंडा ने यूपी से जाकर मक्का में सैटल हुए एक मौलवी सफी उर रहमान ने मदद की, जिसके बाद 1993 में टुंडा सईद से फिर मिला और हिंदुस्तान में दहशतगर्दी के लिए सपोर्ट की मांग की।