
चेन्नई. मद्रास हाईकोर्ट ने मंगलवार को यौन उत्पीडऩ के एक मामले में तमिलनाडु के पूर्व विशेष पुलिस महानिदेशक राजेश दास को दी गई तीन साल की सजा रद्द करने से इनकार कर दिया। न्यायाधीश एम दंडपानी ने विभिन्न याचिकाओं को खारिज करते हुए दास को निचली अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने से छूट देने से भी इनकार कर दिया। न्यायाधीश ने कहा कि पूर्व डीजीपी दोषी हैं और उन्हें आत्मसमर्पण करना होगा, जेल जाएंगे और फिर सजा के निलंबन के साथ-साथ उच्च न्यायालय के समक्ष उनकी पुनरीक्षण याचिका के निपटारे तक जमानत देने की मांग करेंगे।
यह है मामला
दास को विल्लुपुरम की स्थानीय अदालत ने 2021 में एक महिला आईपीएस अधिकारी का कथित तौर पर यौन उत्पीडऩ करने के लिए दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। न्यायाधीश ने कहा कि महिलाओं की गरिमा भंग करने या उनके साथ अभद्र व्यवहार से जुड़े मामलों में अदालतों को आरोपियों की सजा रद्द करते वक्त बहुत चौकस रहना चाहिए और धीमी गति से काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा मामला एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा है, जो पुलिस बल में बहुत ऊंचे पद पर आसीन था।
उन्होंने कहा, पुलिस एक अनुशासित बल है, जिसमें शीर्ष पदों पर बैठें लोगों को उच्च अनुशासन का प्रदर्शन करना चाहिए और उन्हें खुद को देश के नागरिकों के लिए रोल मॉडल के रूप में पेश करना चाहिए। न्यायाधीश ने कहा कि मौजूदा मामले में पुनरीक्षण याचिकाकर्ता पर आरोप लगाया गया था कि उसने अपने अधीनस्थ एक महिला कर्मचारी के साथ अभद्र व्यवहार किया। जब आम जनता महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार करती है तो यह पुलिस अधिकारी कार्रवाई करते हैं। न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें बिना किसी भय या पक्षपात के अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए उच्च सम्मान की नजर से देखा जाता था।
Published on:
23 Apr 2024 05:17 pm
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