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पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों के मामले में महाराष्ट्र अव्वल

लोगों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी उठाने वाली पुलिस की वर्दी हिरासत में होने वाली मौतों के छींटों से भी दागदार है। देखिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट।
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Custodial Death

अगर किसी व्यक्ति के मंगल पर्वत पर क्रॉस का निशान होने के साथ उसका गुरू ग्रह भी कमजोर हो तो ऐसे लोग खुद को यातनाएं देते रहते हैं। इनका घर—परिवार से ज्यादा नाता नहीं रहता है। ऐसे लोगों की किस्मत में अपमानित होना लिखा होता है। कई बार तो इन्हें जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।

हैदराबाद। तीन साल पहले बोनालू उत्सव के दौरान गांधीनगर के वाल्मीकिनगर निवासी 53 वर्षीय गंडप्पा की एक पुलिसवाले के साथ बहस हो गई थी। इसके बाद गंडप्पा को हिरासत में लेकर रात भर मरेडपल्ली पुलिस स्टेशन में रखा गया। अगले दिन उन्हें हिरासत से छोड़ दिया गया लेकिन उनकी हालत काफी बिगड़ी हुई थी। परिजन उन्हें गांधी अस्पताल ले जाने लगे लेकिन रास्ते में ही गंडप्पा ने दम तोड़ दिया।

साल 2017 में तेलंगाना राज्य में पुलिस हिरासत में सात लोगों की मौत हुई, जिनमें गंडप्पा भी एक थे। अगर बात करें पुलिस हिरासत में हुई सर्वाधिक मौतों वाले राज्य की तो इस सूची में देश में सबसे पहला नंबर महाराष्ट्र का आता है। महाराष्ट्र के बाद पुलिस हिरासत में सर्वाधिक मौतें तेलंगाना और फिर कर्नाटक में होती हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2017 के दौरान देशभर में 74 लोगों की मौत पुलिस हिरासत में हुई।

2 अगस्त 2017 तक महाराष्ट्र में पुलिस हिरासत में कुल 16 मौतें हुईं और इस संख्या के चलते यह राज्य देश का नंबर वन राज्य बना। हालांकि राज्य के ऊपर यह बदनुमा दाग ही है, लेकिन यह आंकड़े पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान उठाते हैं। महाराष्ट्र के बाद हिरासत में हुई 7 मौतों के चलते तेलंगाना दूसरे और 5 मौतों की वजह से कर्नाटक तीसरे स्थान पर आता है।

वहीं, 25 जुलाई 2018 तक हिरासत में हुई मौतों के आरोप में किसी भी पुलिस अधिकारी पर मुकदमा नहीं चला। हालांकि केरल में बुधवार को विशेष सीबीआई अदालत द्वारा सुनाया गया फैसला ऐतिहासिक रहा है और इसमें अदालत ने हिरासत में छह पुलिसवालों को मौत का दोषी मानते हुए दो को फांसी की सजा सुनाई जबकि तीन को 3-3 साल कारावास की। वहीं, छह में से एक पुलिसवाले की पहले ही मौत हो चुकी है।

गौरतलब है कि हिरासत में होने वाली मौतों के सिलसिले में पूरी जानकारी सामने आना मुश्किल होता है। इसकी वजह पुलिस ही होती है। सभी राज्यों की पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों की जानकारी देने से तकरीबन इनकार ही करती रहती है।