नई
दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने 2002 के बहुचर्चित नीतीश कटारा हत्याकांड मामले में अहम
फैसला सुनाते हुए तीनों दोषियों - विकास यादव, विशाल यादव और सुखेदव पहलवान को दोषी
ठहराए जाने के फैसले को सही ठहराया। हालांकि न्यायालय सजा की अवधि कम किए जाने के
तीनो अपराधियों के अनुरोध पर विचार करने को राजी हो गया। शीर्ष अदालत ने दोषसिद्धि
के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले पर मुहर लगाते हुए कहा कि इन अपराधियों द्वारा
किया गया अपराध तात्कालिक नहीं था, बल्कि सोची समझी साजिश थी। हालांकि शीर्ष अदालत
ने आरोपियों की उम्रकैद की 30 साल की सजा को कम किए जाने का विकल्प खुला होने की
बात कही है। न्यायालय ने सभी दोषियों की सजा को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस
जारी कर जवाब मांगा है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने हत्या के सभी आरोपियों को
30 साल की उम्रकैद की सजा सुनाई थी। शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के फैसले पर मुहर
लगाते हुए बाहुबली नेता डीपी यादव के बेटे विकास, भांजे विशाल और सुखदेव पहलवान को
कटारा की हत्या का दोषी माना है। गौरतलब है कि एक समय पश्चिमी उत्तर प्रदेश के
बाहुबली नेताओं में शुमार किए जाने वाले डी.पी. यादव की बेटी भारती यादव और नीतीश
कटारा के बीच प्रेम-प्रसंग था। इससे खफा होकर विकास, विशाल और सुखदेव पहलवान ने
मिलकर नीतीश कटारा का कत्ल कर दिया।
दिल्ली से लगे गाजियाबाद में 16 फरवरी
2002 को एक शादी के दौरान नीतीश कटारा का अपहरण करके यादव भाइयों और सुखदेव पहलवान
ने हत्या कर दी थी। भारती ने ही नीतीश की मां नीलम कटारा को फोन से खबर दी थी कि
उसके भाई शादी समारोह से नीतीश को अपने साथ जबरन कहीं ले गए हैं। इस मामले में 20
फरवरी 2002 को बुलंदशहर के खुर्जा गांव में हापुड़ क्रासिंग के पास से नीतीश का शव
जली अवस्था में मिला।
पुलिस का शक विकास और विशाल यादव पर गया। इसी दिन
नीतीश कटारा की दोस्त भारती यादव इंग्लैंड चली गई। अगले ही 11 मार्च को पुलिस ने
करनाल में जीटी रोड से वह टाटा सफारी बरामद की, जिससे नीतीश का अपहरण कर हत्या कर
की गई थी। 31 मार्च को उत्तर प्रदेश पुलिस ने महज चार पेज की चार्जशीट रिपोर्ट
गाजियाबाद की अदालत में दायर की।