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साइको किलर बोला- चींटी नहीं हटी तो पूरी पिस्टल की मैगजीन शरीर पर दी दाग

बर्रा पुलिस के मुताबिक, आलम छह भाई और छह बहनें हैं। इनमें पांचवें नंबर का आलम है। इसके दो भाई जीशान और आफताब का चकेरी थाने में आपराधिक इतिहास है।

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Sujeet Verma

Jan 26, 2016

कानपुर. मैं उस रात टंटी वाली गली में स्मैक लेने गया था, लेकिन बारिश होने के कारण स्मैक नहीं मिली। काफी थका था, क्योंकि मुंबई से जरनल बोगी में बैठकर कानपुर आया था। पहले टीटी से भिड़ंत हुई थी, वह जिन्दा बच गया, क्योंकि पास में पिस्टल नहीं थी। मूड खराब था, ऊपर से पानी में भीग रहा था (स्मैकियों को पानी से नफरत होती है)। वह ‘चींटी’ (छोटा बच्चा) बीच रास्ते में साइकिल लेकर खड़ा था, मैंने कहा हटो तो बोला जल्दी है, रुके रहो, बस आव देखा न ताव, कमर से निकाली पिस्टल और चला दीं गोलियां। बच्चे का जिस्म छलनी हो गया। इसके बाद बर्रा हाईवे होते हुए सनिगवां अपने घर चला गया।’ रोंगटे खड़े कर देने वाली यह बयानबाजी साइको किलर मो. शाह आलम की है, जिसे रविवार को अकबरपुर में पकड़ा गया और फिर उसने बर्रा दो में मासूम किशोर हीरालाल की हत्या की वारदात सिलसिलेवार बताई।


मैने चींटी के शरीर पर दागी थीं 5 गोलियां

अकबरपुर कोतवाली रात करीब समय- 1 बजकर 35 मिनट सीओ गोविंदनगर विशाल पांडेय, एसओ बर्रा तुलसीराम
और एसओ अकबरपुर अखिलेश यादव के बीच पीले रंग की बनियान और जींस पहने बैठे आलम से पुलिस का एक ही
सवाल था, मासूम हीरालाल को क्यों मारा। चेहरे पर पागलो सी मुस्कुराहट लाते हुए आलम बोला, उस रात स्मैक न मिलने का गुस्सा था। सिर भन्ना रहा था, उस पर बारिश के कारण कुछ सूझ नहीं रहा था। तभी रास्ते में वो चींटी (हीरालाल) आ गया।

उस पर कितनी गोलियां चलाईं, मुझे खुद नहीं पता। घटना की रात अपने घर सनिगंवा जाकर पिस्टल को मिट्टी में दबा दिया था। पुलिस को बरामद पिस्टल में मिट्टी लगी हुई मिली है। इसके बाद दिल्ली भाग गया था। एक दिन पहले ही लौटा था और स्मैक की तलाश में भटक रहा था तभी अकबरपुर पुलिस के हाथ लग गया।

पीछे पड़ी थी पुलिस और मीडिया

पूछताछ के दौरान आलम बोला कि पुलिस और मीडिया उसके पीछे पड़ी हुई थी। सीसीटीवी कैमरे में फोटो कैद होने के बारे में पढ़ा तो डर गया। लगा कि पुलिस पीछे पड़ जाएगी। इसलिए रविवार को देहात की ओर भाग रहा था। जिस पिस्टल की पांच गोलियां आलम ने हीरा के दुबले पतले शरीर पर उतार दीं, उस पिस्टल को हीरा ने कानपुर देहात से महज 2000 रुपये में खरीदा था। आलम के मुताबिक,
उसने पिस्टल जुएं की फड़ से खरीदी थी। वह टूटी हुई थी, बाद में उसे ठीक कराकर काम के लायक बनाया।

सीओ गोविंदनगर ने बताया कि हीरा ने मौत से पहले गोली मारने वाले के चेहरे पर मोटी मूंछ का जिक्र किया था। जब उन्हें रविवार रात आलम के पकड़े जाने का पता लगा तो उन्होंने अकबरपुर पुलिस से पहला सवाल यही पूछा कि क्या उसके मोटी मूंछ है। हां में जवाब मिलते ही वे देर रात अकबरपुर पहुंच गए।

भाई भी है अपराध की दुनिया में

बर्रा पुलिस के मुताबिक, आलम छह भाई और छह बहनें हैं। इनमें पांचवें नंबर का आलम है। इसके दो भाई जीशान और आफताब का चकेरी थाने में आपराधिक इतिहास है। पुलिस ने बताया कि आलम चकेरी के सेंट्रल स्कूल का छात्र रहा है। उसने ग्रेजुएशन किया है।

पुलिस ने बताया कि दिल्ली के शातिर अपराधी वसीम बिल्ली और संजय सेठी के साथ मिलकर आलम ने वहां तीन साल पहले एक वाइन शाप में लूट की थी। बाद में सेठी और बिल्ली की हत्या हो गई। उनकी हत्या में भी आलम का नाम आया था। हालांकि आलम का कहना है कि वह लूट में तो शामिल था लेकिन उन दोनों की हत्या से उसका कोई वास्ता नहीं है।

स्मैक और महिलाएं हैं कमजोरी
अकबरपुर कोतवाली में पुलिस के सामने आलम ने जो कुछ बोला, उससे पुलिस का अंदाजा है कि स्मैक और खूबसूरत लड़कियां उसकी कमजोरी और साइको होने की वजह हैं। आलम की प्रेमिका आशा इस वक्त लखनऊ जेल में बंद है। चौक की रहने वाली आशा को चार किलो स्मैक बरामदगी में जेल भेजा गया है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार शाह आलम पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खतरनाक गैंगों से जुड़ा है। गैंग के लिए आलम ने दिल्ली और हरियाणा में भी वारदात की हैं। मुंबई, लखनऊ, कानपुर, कानपुर देहात में भी उसके नाम अपराध दर्ज हैं और तकरीबन हर शहर में उसके ठिकाने हैं। पुलिस को फिलहाल चकेरी में एनडीपीएस और रेल बाजार में गैंगेस्टर की ही जानकारी मिल सकी है।

साइको किलर का मोबाइल से परहेज
आलम का कहना है कि वह मोबाइल का इस्तेमाल नहींकरता है, इसलिए कभी पकड़ा नहीं जाता। हालांकि हीरा की हत्या के दौरान पुलिस को हत्यारोपी के कान में फोन की लीड लगे होने की जानकारी मिली थी। पुलिस की माने तो घटनास्थल टीटी पार्क और कोचिंग मंडी के बीच ही है, आलम को रिमांड पर लेकर उससे सही घटनास्थल का पता किया जाएगा।

आलम ने पूछताछ में बताया है कि बर्रा दो, यादव मार्केट के आस-पास उसे स्मैक मिल जाती है। वहां कई कोचिंग भी हैं जिनके नए लड़कों को स्मैक माफिया अपने जाल में फंसाते हैं। वह और तमाम अपराधी वहां के अड्डों से स्मैक लेने आते थे। इसके अलावा बाइपास पर खुले दर्जनों होटलों और रेस्टोरेंटों में अवैध रूप से शराब पिलाने के अड्डे भी हैं, जहां अपराधियों का जमावड़ा लगता है। आस-पास के इलाकों से आने वाले अपराधी यहां नशा करने के बाद हाईवे पर फर्राटा भरते हैं और अक्सर लूट या अन्य वारदात करने से नहीं चूकते।

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