
vijay mallya
नई दिल्ली। किंगफिशर बैंक लोन प्रकरण में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में खुलासा हुआ है कि विजय माल्या ने 6000 करोड़ रुपये से अधिक लोन की रकम शेल कंपनियों (मुखौटा कंपनी) के माध्यम से देश से बाहर निकाल दी है। वहीं इन सभी तथ्यों के आधार पर जांच में जुटी सरकारी एजेंसियां बहुत जल्द इंग्लैंड में रह रहे शराब कारोबारी विजय माल्या के खिलाफ नई आरोप पत्र दाखिल करने की तैयारी कर रही हैं।
ऐसे ठिकाने लगाई रकम
बता दें कि किंगफिशर के मालिक विजय माल्या को आईडीबीआई बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में दोषी करार दिया जा चुका है। जबकि पिछले साल से ही माल्या की इंग्लैंड से प्रत्यर्पण के प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले दिनों मई में दाखिल किए गए आरोप पत्र के अनुसार विजय माल्या ने आईडीबीआई बैंक से कर्ज के रूप में ली गई आधी राशि को आधा दर्जन शेल कंपनियों की सहायता से देश के बाहर निकाल दिया है। जांच में सामने आया है कि शेल कंपनियां खोलने के लिए विजय माल्या ने अपने निजी स्टॉफ और सेवानिवृत कर्मचारियों की सहायता ली थी।
6,027 करोड़ रुपये का लोन
जांच एजेंसियों के अनुसार शराब कारोबारी विजय माल्या ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले एक दर्जन बैंकों के कंसॉर्टियम से 2005 से 2010 के बीच 6,027 करोड़ रुपये का लोन उठाया था। बैंक सूत्रों के अनुसार अब ब्याज जोड़कर यह रकम 9000 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गई है। बता दें कि पिछले हफ्ते माल्या के खिलाफ ब्रिटिश सरकार ने जांच का आदेश दिया है जिससे यह पता किया जा सके कि क्या शेल कंपनियों के उसके कारोबार में माल्या की इंग्लैंड में रजिस्टर्ड कंपनियां भी शामिल हैं। आपको बता दें कि माल्या के प्रत्यर्पण से पहले भारतीय जांच एजेंसियों को इंग्लैंड की अदालत में यह साबित करना होगा माल्या ने सरकारी बैंकों के साथ धोखाधड़ी करते हुए मनी लॉन्डरिंग का सहारा लेकर देश से पैसा बाहर निकाला है।
Published on:
25 Sept 2017 01:04 pm
बड़ी खबरें
View Allक्राइम
ट्रेंडिंग
