
Ajit Pawar passes away: डिप्टी सीएम अजीत पवार की अचानक प्लेन हादसे में मौत होने की वजह से महाराष्ट्र की राजनीति को छति पहुंची है। उनके जाने के बाद से अब एनसीपी को लेकर कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं। इसके साथ ही महाराष्ट्र सरकार की भी धकड़नें तेज हो गई है कि अब पार्टी का कमान किसके हाथ होगा। क्योंकि राज्य में हुए निकाय चुनाव में खींचातानी के बीच दोनों अजित पवार अपने चाचा शरद पवार के करीब आ रहे थे।
आपको बता दें कि अजित दादा के जाने के बाद से सबकी नजर इस पर टिकी है कि अब लीडर के बिना पार्टी किस दिशा में जाने वाली है। सियासी पंडितों का मानना है कि महाराष्ट्र की सियासत में ‘दादा’ के नाम से पहचाने जाने वाले अजीत अनंतराव पवार का निधन ऐसे समय में हुआ है, जब राज्य की राजनीति बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही थी। विधानसभा चुनाव में अपने चाचा और राजनीतिक मार्गदर्शक शरद पवार की पार्टी एनसीपी (एसपी) पर बढ़त हासिल करने के बाद स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर दोनों गुटों के बीच दूरियां कम होती दिख रही थीं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज थी कि आने वाले समय में नए समीकरण बन सकते हैं और पुराने मतभेद सुलझने की दिशा में कदम बढ़ सकते हैं। ऐसे संवेदनशील और निर्णायक दौर में अजीत पवार का जाना महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
महाराष्ट्र में चल रहे जमकर सियासी हलचल के बीच पिछले 6 महीनों में देखा जाए तो पवार परिवार एक दूसरे के करीब आया है। बात यहां तक पहुंच गई थी कि खबर आने लगी कि महाविकास अघाड़ी में वापसी अजित पवार की वापसी भी हो सकती है। वहीं, रणनीतिकारों का मानना है कि अजित दादा के जैसे लोगों को जोड़ कर रखने की कला और पार्टी प्रबंधन करना किसी और नेता के बस में नहीं है। उनके इसी गुण की वजह से जहां चाचा की पार्टी से सीधा मुकाबला था, वहां से उन्होंने ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की।
आपको बता दें कि शरद पवार के साथ अजीत पवार के रिश्तों में खटास की शुरुआत 2005 के आसपास मानी जाती है, जब सुप्रिया सुले ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। इसके बाद दोनों के बीच मतभेद धीरे-धीरे बढ़ते चले गए। अजीत पवार ने पहली बार खुली बगावत 2019 में की, जब उन्होंने पार्टी से अलग होकर भाजपा के देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाने में भूमिका निभाई और स्वयं उपमुख्यमंत्री बने। हालांकि यह सरकार सिर्फ तीन दिन ही चल सकी और अजीत पवार को इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद जुलाई 2023 में उन्होंने एक बार फिर बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए अपने चाचा शरद पवार से अलग राह चुनी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार में शामिल होकर उपमुख्यमंत्री पद संभाला।
Updated on:
28 Jan 2026 08:19 pm
Published on:
28 Jan 2026 08:17 pm

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