17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अस्पताल में आई सरकारी दवाएं एक्सपायरी हुई फेका कूड़े में

सरकारी एक्सपायरी दवाएं बुधवार की सुबह भितरवार सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की बाउंड्रीवाल के पास पड़ी देखी गई हैं।

2 min read
Google source verification

डबरा

image

monu sahu

Jun 08, 2018

What is the answer when the collector asked for vaccination informatio

अस्पताल में आई सरकारी दवाएं एक्सपायरी हुई फेका कूड़े में

डबरा. एक तरफ सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दवाएं नसीब नहीं हो पा रही है वहीं दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों में रखे-रखे दवाएं एक्सपायरी हो रही है। ऐसा ही एक मामला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का सामने आया है। जहां पर दवाएं कचरे में फेंक दी गईं। सरकारी एक्सपायरी दवाएं बुधवार की सुबह सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की बाउंड्रीवाल के पास पड़ी देखी गई हैं।
शीशी, गोलियां, कैप्सूल खुले में पड़े थे
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की बाउंड्रीवाल के पास सरकारी दवाओं की शीशी व गोलियां, केप्शूल बड़ी मात्रा में पड़े हुए थे। इन पर वहां से निकलने वाले लोगों की नजर पड़ी तो उन्होंने पत्रिका को बताया। इस पर पत्रिका टीम मौके पर पहुंची तो पाया कि बड़ी मात्रा में सरकारी दवाएं पड़ी हैं। इन दवाओं को गौर से देखा गया तो पाया कि ये एक्सपायरी हो चुकी हैं। इन दवाओं में आयरन की गोलियां व कैप्शूल और मल्टी विटामिन के सीरप थे।
कुछ दवाओं को नष्ट करने के लिए जलाया
मौके पर देखा गया कि कुछ दवाओं को जलाया भी गया था। जहां दवाएं पड़ी मिली वहां कुछ लोगों ने बताया कि बुधवार की शाम तक यहां कुछ नहीं था इससे संभावना जताई जा रही है कि इन दवाओं को रात में लाकर फेंका गया है। मरीजों को इन्हें नहीं बांटे जाने से यह बच गईं।
मरीजों को नहीं बांटी इसलिए हुईं एक्सपायरी
बड़ी मात्रा में सरकारी दवाओं के मिलने से यह बात तो साफ है कि अस्पताल में मरीजों को दवाओं का वितरण नहीं किया गया। अगर मरीजों को दवाएं बांटी गई होती तो इतनी दवाएं बची कैसे रह सकती थी जो एक्सपायरी हो गई हैं। इससे यह साबित होता है कि अस्पताल में मरीजों के इलाज में लापरवाही के साथ उन्हें दवा देने में भी आनाकानी की जाती है।
खुले में पड़ी दवाओं से हो सकता है संक्रमण
नियमानुसार जो दवाएं एक्सपायरी हो जाती है उन्हें गड्ढा खुदवाकर गढ़वाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। ये दवाएं किसी के लिए खतरा बन सकती थी। अस्पताल परिसर के पास से छोटे-छोटे बच्चे भी निकलते हैं अगर किसी बच्चे ने इन दवाओं को खा लिया होता है तो कुछ भी हो सकता था। इसके अलावा मवेशी भी इन गोलियों और कैप्शूलों को खा सकते थे।