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लोगों को निशुल्क मास्क बना कर दे रहे है दर्जी ठाकुरदास नामदेव

मोहना गांव के रहने वाले 55 साल के टेलर ठाकुरदास नामदेव भी दुकान बंद होने और ग्राहक नहीं आने से परेशान तो है पर खाली नहीं बैठे हैं। वे अब मास्क बनाकर समाजसेवा में जुट गए हैं।

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डबरा

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rishi jaiswal

Apr 20, 2020

लोगों को निशुल्क मास्क बना कर दे रहे है दर्जी ठाकुरदास नामदेव

लोगों को निशुल्क मास्क बना कर दे रहे है दर्जी ठाकुरदास नामदेव

डबरा/भितरवार. संकट के इस दौर में टेलर भी खाली बैठे होने पर कपड़े का मास्क बनाकर जरुरतमंदों को मास्क बांट रहे है। हालांकि वर्तमान में मास्क बना कर सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले टेलरों को गांव में भी लोगों ने भूला ही दिया है। रेडीमेड के चलन के कारण दर्जियों के पास अब कोई कपड़े सिलवाने नहीं जाता है। ऐसे में दर्जियों पर भी संकट बना हुआ है।

लॉकडाउन होने से इनकी की दुकानें बंद है। मोहना गांव के रहने वाले 55 साल के टेलर ठाकुरदास नामदेव भी दुकान बंद होने और ग्राहक नहीं आने से परेशान तो है पर खाली नहीं बैठे हैं। वे अब मास्क बनाकर समाजसेवा में जुट गए हैं।

लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रोज बचे कपड़ों में से 30 से 35 मास्क तैयार कर रहे है। जरुरतमंदों को नि:शुल्क मास्क बांट भी रहे है। पत्रिका से बातचीत में ठाकुरदास नामदेव ने बताया कि अभी तक 600 मास्क बनाकर बांटे गए है दुकान बंद होने से वे घर पर ही मशीन ले आए है और घर पर बैठ कर मास्क बनाने का काम कर रहे है। उनके दो लड़के है शादीशुदा होने से वे अलग रहते है। टेलरिंग कर अपना खर्चा चलाते है। लॉकडाउन के पहले रोज 500 रुपए की कमाई होती थी।

स्वप्रेरणा से मास्क बनाकर बांट रहे - अब खाली बैठे है तो जमा की हुई पूंजी से ही गुजारा कर रहे है। खाली बैठे होने पर बचे हुए कपड़े से मास्क बनाना शुरू किया। फिर सोचा कि जो लोग मास्क नहीं ले पा रहे है उन्हें मास्क बांटना शुरू किया। यह सही है कि रेडीमेड के कारण सिलाई के कपड़ों की डिमांड कम है युवा पीढ़ी सिलाई के कपड़ों पहनना पसंद नहीं करती। हालांकि उनकी दुकानदारी ग्रामीण परिवेश की है, गांव के बुजुर्ग लोग कपड़े सिलवाकर ही पहनना पसंद करते हैं, इस वजह से थोड़ा बहुत काम चल जाता है।