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छतरपुर रोड पर 15 खतरनाक जानलेवा मोड़, छोटी-बड़ी चढ़ाई, घाटी ब्लैक पॉइंट

बटियागढ़ से दरगुवां तक सफर सबसे ज्यादा खतरनाक, न संकेतक न मदद के लिए मिलते हैं लोग

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दमोह

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Samved Jain

Feb 11, 2025

Damoh Chhatarpur Road black Spot

Damoh Chhatarpur Road black Spot

दमोह. दमोह से छतरपुर रोड पर हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। जिसका कारण यहां खतरनाक मोड, छोटी-बड़ी चढ़ाई और घाटी होना है। यहां कब दुर्घटनाएं हो जाएं, कहा नहीं जा सकता है। ब्लैक पॉइंट होने के बाद भी प्रशासन द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, न ही इस संबंध में कोई खास कार्रवाई की जा रही है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं।
सड़क की हकीकत जानने के लिए दमोह से छतरपुर रोड पर सफर किया। दमोह से बटियागढ़ यानि ४० किमी तक तो जर्नी खतरे से बाहर थी, लेकिन बटियागढ़ पहुंचने के बाद शुरू हुई जर्नी काफी खतरनाक थी। बस से जाने पर यहां हर समय ऐसा महसूस होता है कि कब दुर्घटना हो जाए। बटियागढ़ की छोटी चढ़ाई से शुरू हुए इस खतरनाक सफर का अंत ३५ किमी तक नहीं होता है।

शुरू में छोटी और बड़ी घाटी सबसे बड़े दुर्घटना पॉइंट
बटियागढ़ निकलते ही नीमन तिराहे से १ किमी आगे छोटी चढ़ाई शुरू हो जाती है। जो दिखने में तो आम नजर आती है, लेकिन यहां अच्छे से अच्छे वाहन फेल हो जाते हैं। इसके २ किमी आगे बड़ी चढ़ाई शुरू होती है, जिस पर रोजाना कोई न कोई दुर्घटना जरूर होती है। यहां सबसे ज्यादा हादसे छतरपुर की ओर से आने वाले वाहनों के होते हैं, जिसका कारण सड़क निर्माण में कोई बड़ी गड़बड़ी बताई जाती है, जिससे कारण यहां वाहन अनियंत्रित हो जाते हैं। इस चढ़ाई पर सामने की तरफ नहीं दिखना और एक अंधा मोड़ सबसे ज्यादा खतरनाक है। इसके अलावा यहां के गड्ढे भी वाहन चालकों का सिरदर्द बढ़ाते हैं। इतना ही नहीं करीब ६ किमी आगे सीमा मोड़ भी यहां सबसे खतरनाक है। जहां भी आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं। यहां से निकलने के बाद ही यात्री राहत लेते हैं।

बकस्वाहा से पहले और बाद में खतरा ही खतरा
छोटी, बड़ी चढ़ाई और सीमा मोड़ से आगे बढ़कर अब हम बकस्वाहा की ओर बढ़ रहे हैं। जहां रोड पर काफी गड्ढे हैं। यहां बकस्वाहा के पहले जुझारपुरा का मोड़, बकस्वाहा की टेक, अमोदा के पास के टर्न काफी खतरनाक है। इस बीच के ४ अंधे मोड़ सबसे ज्यादा खतरनाक है, जिससे खतरा ही खतरा रहता है। बकस्वाहा तक की यात्रा के बाद भी खतरा टलता नहीं है, क्यों आगे की जर्नी और मोड़ और भी खतरे से भरे रहते हैं।

२५ किमी में दर्जन भी अंधे मोड़, हर समय रहता है खतरा
बकस्वाहा निकलने के बाद जैसे ही हीरापुर और आगे दरगुवां तक के रोड पर जाते हैं तो जंगल का सुनसान और अंधे मोड़ की भरमार यात्रियों को हैरान कर देती है। यहां दर्जन भर से अधिक ऐसे मोड़ है, जहां कब दुर्घटना हो जाए, कहा नहीं जा सकता। पहली बार इस सड़क पर यात्रा करना भी मुश्किल हैं, क्योंकि यहां थोड़ी सी लापरवाही दुर्घटना में बदल जाती है। यहां हीरापुर से ४ किमी बाद घाट सेक्शन शुरू होता है, जो दरगुवां तिराहा के पहले तक सूरजपुरा तक है। इस घाट पर भी अंधे और खतरनाक मोड़ लोगों की टेंशन बढ़ाते हैं। ३५ से ४० किमी तक के छोटी चढ़ाई से सूरजपुरा तक के सफर में सिर्फ अंधे मोड़, घाटी ही खतरा नहीं है। बल्कि इस सड़क पर संकेतक भी कम ही नजर आते है।

फैक्ट फाइल
१५५ किमी है दमोह से छतरपुर
४० किमी का छोटी चढ़ाई से सूरजपुरा तक सफर सबसे खतरनाक
५० से अधिक मोड़ इस रोड पर है।
१५ से अधिक मोड़ खतरनाक और जानलेवा
्र३ औसत एक्सीडेंट रोजाना मार्ग पर हो रहे।