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जिंदगी के ‘दंगल’ में बेटी को मिला पिता का सहारा, खेत को बना दिया खेल का मैदान

कहानी दमोह की है। जहां बटियागढ़ ब्लॉक के भिलोनी गांव में रहने वाला पिता बेटी के सपनों को हकीकत में बदलने जुट गया है। आप भी जानें ये Interesting और Motivational Story...

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दमोह

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Sanjana Kumar

Sep 20, 2023

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बेटी के सपनों को पंख दे रहा पिता फिल्म दंगल में जहां आमिर खान अपने सपनों को पूरा करने के लिए बेटियों को पहलवानी के गुर सिखाता है, उनके साथ दिन-रात जी-तोड़ मेहनत कर उन्हें पूरा करके ही दम लेता है। लेकिन एक ऐसा मामला भी सामने आया है जहां पिता ने नौ साल की बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया है। कहानी दमोह की है। जहां बटियागढ़ ब्लॉक के भिलोनी गांव में रहने वाला पिता बेटी के सपनों को हकीकत में बदलने जुट गया है। आप भी जानें ये इंट्रेस्टिंग और मोटिवेशनल स्टोरी...

यह स्टोरी है दमोह जिले के बटियागढ़ ब्लॉक के भिलोनी गांव में रहने वाले पिता रामलखन और उनकी बेटी अश्विनी की। रामलखन ने देखा कि उसकी बेटी को क्रिकेट का बेहद शौक है। पिता रामलखन ने चार साल की उम्र में जब अश्विनी को हाथ में बेट लिए क्रिकेट पिच पर चौके-छक्के लगाते देखा, वे तभी समझ गए थे कि उनकी बेटी को क्रिकेट पसंद ही नहीं है बल्कि उसे क्रिकेट खेलने का जुनून है। बेटी के इसी जुनून ने रामलखन की आंखों में एक सपना संजो दिया कि बेटी को हर हाल में इसी फील्ड में आगे बढ़ाना है। हर हाल में उसे क्रिकेट की सुविधाएं देते हुए कल का स्टार बनाना है। फिर चाहे इसके लिए उन्हें कुछ भी क्यों न करना पड़े।

प्रेक्टिस के लिए खेत को बना दिया पिच

बेटी अश्विनी के क्रिकेट के प्रति क्रेज को देखते हुए रामलखन दंगल के आमिर खान की तरह ही अपनी बेटी के कोच बन गए हैं। वे अपनी हैसियत के मुताबिक अश्विनी के लिए क्रिकेट की हर सुविधा मुहैया कराते हैं। इसके लिए पहली जरूरत थी क्रिकेट प्रेक्टिस की। इस जरूरत को पूरा करने के लिए रामलखन ने अपने ढाई एकड़ के खेत में ही एक छोटी सी पिच बना डाली, इसे नेट लगाकर ठीक वैसे ही तैयार कर लिया, जैसे क्रिकेट प्रेक्टिस पिच होती हैं।

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समय को मैनेज कर खेलते हैं क्रिकेट

रामलखन पेशे से किसान हैं औ खेती-किसानी ही करते हैं। इसके लिए वे अपने खेती-किसानी के काम से कुछ समय निकालते हैं ताकि बेटी अश्विनी के साथ क्रिकेट खेल सकें। पिता बेटी के साथ क्रिकेट खेलने का समय सिर्फ इसलिए नहीं निकालते कि वे खेलना चाहते हैं, बल्कि वे इसलिए क्रिकेट खेलने का समय निकालते हैं ताकि बेटी को क्रिकेट की प्रेक्टिस करवा सकें। पिता रामलखन का कहना है कि इस प्रेक्टिस से उसकी प्रतिभा निखरती है। इसके साथ ही शाम को एक निश्चित समय पर अश्विनी गांव और गांव के आसपास के खिलाडिय़ों के साथ खेलकर भी प्रेक्टिस करती है।

मैं उसका मनोबल बढ़ाता हूं

अश्विनी के पिता रामलखन कहते हैं कि नौ साल की उनकी बेटी अश्विनी फिलहाल तीसरी कक्षा की स्टूडेंट हैं। लेकिन उसे क्रिकेट खेलने का बहुत शौक है। वह क्रिकेटर बनना चाहती है, उसकी लगन और प्रतिभा को देखकर मैं उसका मनोबल बढ़ा रहा हूं। अश्विनी का क्रिकेट के प्रति क्रेज इसी बात से नजर आता है कि वह अभी बहुत छोटी है, लेकिन पढ़ाई के साथ ही वह क्रिकेट के शौक को पूरा कर रही है। क्रिकेट टूर्नामेंट में ले जाते हैं पिता अश्विनी को क्रिकेट इतना पसंद है कि आसपास के गांव में जहां भी क्रिकेट टूर्नामेंट होते हैं, वह अपने पिता रामलखन पटेल के साथ वहां पहुंच जाती है। टूर्नामेंट में खेलने वाले खिलाडिय़ों को खेलते हुए बड़ी ही बारीकी से देखती है, जो गुर सीखने को मिलता है उसे फॉलो करती है। अश्विनी बड़ी होकर भारतीय महिला क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व करना चाहती है।

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