
A doctor who did medicine even after becoming an MLA
दमोह/ हटा. बुंदेलखंड के हटा में 1971 से चिकित्सा कर रहे डॉ. विजय सिंह राजपूत विधायक भी बने। लेकिन उन्होंने मरीजों का इलाज करना नहीं छोड़ा विधायकी कार्यकाल के दौरान भी डिस्पेंसरी टू इन वन हो गई थी, जिसमें ऑफिस के साथ मरीजों का इलाज भी किया जाता रहा है। इनके पास खास तौर पर जब वृद्ध महिलाएं पहुंचती हैं तो बुंदेलीपुट में डॉक्टर साहब बहुओं के हालचाल और खानपान के बारे में पता लगाकर मर्ज समझने का प्रयास करते हैं।
हटा के 74 वर्षीय डॉ. विजय सिंह राजपूत एक ऐसे चिकित्सक हैं, जिन्होंने अपनी प्रैक्टिस शुरू करने के बाद उन्हें राजनीति में आने का मौका मिला लेकिन उन्होंने इस पेशे को नहीं छोड़ा, जिससे अभी भी उसी अंदाज में मरीजों का इलाज कर रहे हैं। हटा की जनता ने डॉक्टर को विधायक बनाने का मन बनाया तब जनता ने एक शर्त रखी थी कि आप विधायक बन जाएं तो डॉक्टरी का पेशा नहीं छोडऩा। जिस पर उन्होंने जनता से वायदा किया था कि यदि जनता उन्हें विधायक बनाती है तो वह मरीजों का इलाज भी करते रहेंगे। 1993 से 1998 तक भाजपा से विधायक रहे तो इनका क्लीनिक टू इन वन हो गया था, जिसमें मरीज को देखने के साथ ही लोगों की समस्याएं भी निपटाई जाने लगी थी।
डॉ. विजय सिंह राजपूत कहते हैं कि मैं जनता का प्रतिनिधि रहा उस दौरान मरीज और काम कराने वाले दोनों आते थे तो उन्होंने दोनों के लिए ही बराबर का समय दिया। क्योंकि वह विधायक के रूप में एक जनसेवक थे और डॉक्टर के रूप में भी उसी भाव से काम कर रहे हैं।
बुंदेली पुट में समझते हैं मर्ज
डॉ. विजय सिंह राजपूत बुंदेली अंदाज में मरीज का मर्ज समझते हैं। उनके पास जो भी पहुंच रहा था उससे पूछ रहे थे का पिरा रओ, दस्त पतरे जा रए के मोटे जा रए। बच्चों से भी ठेठ बुंदेली में बात करते हुए दवाएं लिख रहे थे। एक बुजुर्ग महिला से हास्यपुट में उसकी नब्ज टटोलते रहे कि काए बहू खाबे नहीं देत है काम करने परत है इसी से हाथ-पांव पिरा रए है, बऊ का जवाब का बताए डाक साहब अब अच्छी बहुएं कहा मिलत हैं, वे खुदई के पेट को तो करत नहीं पाउत है हमाए लाने का खाबै दे है। इस तरह हास्य विनोद के बीच में मरीज का इलाज किया जा रहा है।
जब तक सलामत तब तक करेंगे इलाज
एक डॉक्टर के रूप में 74 वर्षीय डॉ. विजय सिंह राजपूत का जज्बा बरकरार है, वह कहते हैं कि जब तक उनके हाथ-पांव व मस्तिष्क काम कर रहा है और वह पूर्ण स्वस्थ्य हैं तब तक वह इलाज करना नहीं छोडेंगे क्योंकि एक डॉक्टर का कर्तव्य है कि उसके यहां पहुंचने वाले मरीज का समुचित इलाज किया जाए।
Published on:
30 Jun 2021 11:20 pm
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