
दमोह. मूसलाधार बारिश के कारण खेतों में ही खराब हो चुकी मूंग, उड़द सहित अन्य फसलों की नुकसानी जिले में २० प्रतिशत से अधिक बताई जाती है। किसानों की फसल का नुकसान हुए महीने भर से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक प्रशासन का सर्वे पूरा नहीं हो सका है। कलेक्टर के निर्देश पर कुछ जगहों पर सर्वे का कार्य हो जरूर रहा है, लेकिन यह सिर्फ स्थानीय दस्तावेजों तक ही सीमित बताया जाता है। ऐसे में मुआवजा के लिए अब राशि आएगी और कब किसानों को मिल पाएगा, इस पर भी संशय बना हुआ है। वहीं फसल बीमा को लेकर भी किसान परेशान है।
धान पर भी बढ़ रहा रोग का खतरा
अति बारिश में खराब हुई अन्य फसलों के बाद अब धान पर भी रोग का खतरा बढ़ता जा रहा है। जिले के तेंदूखेड़ा, जबेरा, पटेरा क्षेत्र में कई किसानों ने धान में रोग लगने की शिकायतें दर्ज कराई हैं। इसके बाद कृषि विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर जायजा भी किया है, लेकिन इस रोग से भी लोगों को निजात मिलती नजर नहीं आती है। ऐसे में धान पर भी खतरा मंडरा रहा है।
प्रशासन के सामने लगा रहे गुहार
बीते दिनों जन सुनवाई में जिले के ग्राम कुम्हारी और आसपास के ग्रामों से किसानों ने पहुंचकर धान की फसल की बीमारी के संबंध में अवगत कराया था। जिस पर कलेक्टर ने उसी समय उप संचालक कृषि को आदेशित किया था की कृषि विभाग के लोग, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, बीमा कंपनी के अधिकारी, राजस्व विभाग के अधिकारी यह चारों की एक टीम बना करके इस पूरे क्षेत्र का भ्रमण कराएं। जिसमें यह बात निकल करके सामने आई की वाकई में कुछ जगहों पर इस बीमारी का प्रकोप हुआ है। कलेक्टर ने कहा हम सर्वे करा रहे है की कहां बहुत स्थाई रूप से नुकसान हो गया है, ताकि किसानों को समय पर मुआवजा मिल सके, जिनके बीमा हैं उनको बीमा की राशि मिल जाए।
कृषि विभाग की टीमें दे रही प्रशिक्षण
धान व अरहर की बड़ी फसल में लगने वाले कीट व रोगों के लक्षण व इनकी रोकथाम के लिए उपायों के बारे में कृषि विभाग के मैदानी अमले को विस्तृत रूप से अवगत कराते हुए कार्यशाला आयोजित की गई। साथ ही उप संचालक कृषि ने विभाग में संचालित योजनाओं की समीक्षा की गई। किसानों को बताया गया कि धान, अरहर फसल में किसी प्रकार का रोग या कीट का प्रकोप प्रतीत होता हैं, तो तत्काल संबंधित क्षेत्र के कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क करें। साथ ही जरूरी जानकारियां भी दी जा रही हैं।
मुआवजा मिले तो किसान की ताकत बढ़े
किसान हरिसिंह, योगेंद्र पटेल, साहब सिंह, महेश लोधी ने बताया कि उनकी फसलें पूरी तरह चौपट हो गई हैं। अभी तक सर्वे के नाम पर महज खेतों का निरीक्षण हुआ है। कितनी फसल उनके खेतों की सर्वे में दर्ज की गई है, यह उन्हें भी नहीं मालूम है। महीना भर से अधिक समय बीतने के बाद भी कार्रवाई यहीं पर रुकी है, ऐेसे में उन्हें मुआवजा कब मिलेगा, समझ नहीं आता है। किसान को अगली फसल की तैयारी करना है, ऐसे में उसे खराब हुई फसल के मुआवजे की सबसे ज्यादा जरूरत है। नुकसान के बाद मुआवजा अब ताकत का काम करेगा। कलेक्टर को चाहिए कि तत्काल उन्हें मुआवजा दिलाने की व्यवस्था करें।
Published on:
15 Oct 2024 12:32 pm
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