
दमोह. दमोह नगर पालिका परिषद आजादी के ७९ साल पहले अंग्रेजी शासनकाल में 1867 में अस्तित्व में आ गई थी। 1883 में नगर पालिका परिषद का पुर्नगठन कर परिसीमन किया गया था, जिसमें 39 वार्ड हो गए थे। इसके बाद 126 सालों में पुन: परिसीमन नहीं हो पाया है। अभी भी नगर पालिका परिषद का परिसीमन लंबित है, लेकिन यह काम अभी तक पूरा न हो पाने के कारण इस बार नगर पालिका परिषद का दायरा बढऩे की संभावना कम नजर आ रही है।
दमोह नगर पालिका परिषद से सटकर ग्रामीण क्षेत्रों में वैध व अवैध कॉलोनियां आकार ले चुकी हैं। शहरी क्षेत्र से लगे करीब 17 गांवों को शहर में मिलाया जाना है। इसके लिए 2005 से मास्टर प्लान में इसे समाहित किया गया है, जो 2021 के मास्टर प्लान में भी शामिल है। लेकिन नगर पालिका परिषद द्वारा इस संदर्भ में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
जनसंख्या की दृष्टि से देखा जाए दमोह शहर व लगे ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर 2 लाख 50 हजार से ऊपर का आंकड़ा 2011 की जनगणना के बाद ही पहुंच गया था, लेकिन नगर पालिका परिषद द्वारा नगर पालिका का पुर्नगठन करने का एक बार भी प्रयास नहीं किया गया है। जानकार बताते हैं कि दमोह को काफी पहले नगर निगम का दर्जा मिल जाना चाहिए, लेकिन राजनीतिज्ञ इसे ठंडे बस्ते में डलवाए हुए हैं।
ये गांव हैं प्रस्तावित
दमोह नगर पालिका परिषद का परिसीमन होता है तो करीब 17 गांव शामिल किए जाएंगे। जिनमें सिंगपुर, धरमपुरा, इमलाई, हिरदेपुर, चौपराखुर्द, चौपरा रैयतवारी, राजनगर खुर्द, लाडऩबाग, पिपरियानायक, मडिय़ा पनगढ़ा, कुलुवा मारुताल, कुंवरपुरा, रसाटोरिया, राजनगर रैयतवारी, समन्ना रैयतवारी, महुआखेड़ा व समन्ना माल गांव को शामिल किया जाना है।
प्रधानमंत्री व अटल आश्रय भी गांव में
नगर पालिका परिषद की प्रधानमंत्री आवास योजना समन्ना रैयतवारी में आकार ले रही है, जहां रियायती के साथ फ्लेटस व ड्यूपलेक्स भी बनाए जा रहे हैं, जो ग्रामीण क्षेत्र में ही आते हैं। वहीं हाउसिंग बोर्ड की अटल आश्रय कॉलोनी राजनगर रैयतवारी में बनकर तैयार हो रही है, आगामी 2020 से यहां रहवास शुरू हो जाएंगे। समन्ना में पीएम आवास में लोगों ने रहवास शुरू कर दिया है।
कपिल खरे, सीएमओ नपा
Published on:
09 Oct 2019 07:09 pm
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