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ओवरब्रिज बनने से पहले ही सामने आ गई शातिर चाल

ओवरब्रिज की टीएस के बाद प्रशासकीय स्वीकृति मिलते ही होगा काम शुरू

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As soon as administrative sanction bridges will start work

As soon as administrative sanction bridges will start work

दमोह. मलैया मिल रेलवे फाटक पर बनने वाले ओवरब्रिज बनने का रास्ता साफ हो गया है, तकनीकी स्वीकृति के बाद प्रशासकीय स्वीकृति भी मिलने वाली है, जिससे आगामी कुछ ही दिनों में ओवरब्रिज निर्माण शुरू हो जाएगा। इसी बीच ओवर ब्रिज की मानक लंबाई में हेर-फेर का मामला भी सामने आया है, जिसमें 7 करोड़ रुपए अधिकता का भार भी शासन के ऊपर वे-वजह डाला गया है।
रेलवे के एलो बुक में सालो से मलैया रेलवे ब्रिज स्वीकृत है, यह रेल विभाग के स्पेशल कैटेगरी का ओवर ब्रिज है, जो सालों लंबित है। वर्तमान कांग्रेस सरकार इस ओवर ब्रिज के निर्माण को लेकर काफी संजीदा नजर आ रही है, जिससे इसके हर बिंदु पर सीधे सरकार की निगाह है। सूत्र बताते हैं कि इस ओवर ब्रिज की लंबाई घटाए व बढ़ाए जाने का मामला भी सरकार तक पहुंच चुका है।
ओवर ब्रिज निर्माण में मानक लंबाई 300 मीटर ही रखी जाएगी, लेकिन लोक निर्माण विभाग के सेतु निगम ने नक्शा में तीन गुल्ली जबलपुर रोड की ओर 285 मीटर लंबाई रखी है, वहीं पथरिया रोड साइड 549 मीटर कर दी है। तीसरी घंटाघर की रोड पर 267 मीटर की गई है। तीनों ओर के लैग्ज घटाए बढ़ाए जाने से 7 करोड़ का अतिरिक्त भार शासन के ऊपर पड़ रहा था।
जानकार बताते हैं कि मलैया ओवरब्रिज निर्माण की लंबाई व सर्विस रोड को लेकर कई बार डिजाइन में हेरफेर कराई गई है, जिसकी वजह से मामला लंबा लटकता रहा है, लेकिन कांग्रेस सरकार और खासतौर पर दमोह विधायक राहुल सिंह की विशेष रुचि के चलते ओवर ब्रिज की सभी अड़चनों को हैंडिल करते हुए सीएम से उद्घाटन कराने की तारीख घोषित करने की रणनीति बनाई जा रही है।
सर्विस रोड में मानकों की अनदेखी
ओवर ब्रिज के नीचे सर्विस रोड भी लोगों की सहूलियत के लिए बनाई जाना आवाश्यक है, लेकिन सर्विस रोड 170 मीटर केवल पथरिया रोड पर मलैया मिल के पास रखी गई है, शेष जगह कम कर दी गई है, जिससे खासतौर पर तीनगुल्ली से जबलपुर रोड व घंटाघर रोड के मामले में मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। पथरिया फाटक ओवर ब्रिज की पूर्व स्थितियों को देखते हुए इस पर आरंभ से ध्यान दिया जाने लगा है।
अधिकारियों पर हो सकती है कार्रवाई
मानक लंबाई को दरकिनार कर तकनीकी स्वीकृति देने वाले अफसरों में सेतु निगम एसडीओ रतिराम पटेल, इइ सेतु सागर पीएस पंथ, एसइ सेतु ग्वालियर, सीइ सेतु भोपाल आशाराम सींग, ब्रिज कॉरर्पोरेशन मप्र इएनसी भोपाल शामिल हैं। अब प्रदेश सरकार यह जानने का प्रयास कर रही है कि किसके मनमुताबिक दोनों ओर ओवरब्रिज लंबाई घटाई जा रही है। सूत्रों की मानें तो इस मामले में बड़ी कार्रवाई भी होने वाली है। इसके साथ प्रशासकीय स्वीकृति के साथ ही रिवाइज तकनीकी स्वीकृति का पत्र भी लगने वाला है, जिससे मानक लंबाई पर ही ओवर ब्रिज का निर्माण किया जाएगा।