
Balram Tal clause still stops pond
दमोह. कृषि विभाग द्वारा वर्ष 2007 से बलराम ताल योजना का संचालन किया जा रहा था, जो 1 अप्रेल 2018 से बंद कर दी गई है। इधर योजना के बंद होने के बाद भी अधिकांश किसानों को कृषि विभाग के भू-सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों ने अंधेरे में रखकर किसानों के खेत पर तालाब खुदवा दिए गए हैं।
बलराम ताल योजना किसानों के खेत पर ही खोदे जाने और पानी का प्रबंध करने के लिए अच्छी खासी योजना थी। इस योजना के तहत किसान को उसके खेत से ही संचित पानी मिलता था। नए बजट के आने के बाद सैकड़ों किसानों ने अपने खेतों पर तालाब तो खुदवा दिए हैं, लेकिन उन्हें एक रुपया भी नहीं मिला है। कृषि उपसंचालक दमोह के अनुसार इस साल बलराम ताल योजना का लक्ष्य नहीं दिया गया और यह योजना बंद कर दी गई।
दमोह जिले में बलराम ताल योजना बंद होने के के पीछे का कारण बड़ी सिंचाई परियोजनाएं पंचमनगर, सीतानगर, साजली, जूड़ी व सतधरु पर अरबों रुपए व्यय किया जाना माना जा रहा है। वर्तमान में पंचमनगर योजना ही पूर्ण हुई है। जिससे केवल बटियागढ़ ब्लॉक के गिने-चुने गांव ही लांभान्वित हो रहे हैं।
वर्ष 2017 में एक हजार से अधिक आवेदन जमा किए थे, जबकि 330 तालाब बनाने का लक्ष्य मिला था। आवेदनों की संख्या दर्शाती है कि यह योजना किसानों के लिए कितनी लाभप्रद थी, लेकिन लक्ष्य से भी कम 270 के करीब तालाबों का निर्माण ही कराया गया था। इतना ही नहीं इसी में पुराने तालाबों को नया बताकर भुगतान कराए जाने की शिकायतें भी सामने आई थीं।
ये खुदवा के बैठे हैं ताल, नहीं मिली राशि
बकैनी गांव के सरदार सिंह, करन सींग, ममरखा गांव में विनीता बाई, प्रान सींग, बल्देव सींग, रघुवीर सींग, कौशल असाटी, पिंकी असाटी जैसे अनेक किसान हैं जिनको योजना के बंद होने की जानकारी नहीं दी गई। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बलराम ताल योजना का लक्ष्य मिलने की आस में मई जून में इनके तालाब खुदवा दिए। जबकि योजना बंद होने की जानकारी 1 अप्रैल 2018 को ही पहुंच गई थी।
दलालों के चंगुल में फंसी थी योजना
जिले के जिन किसानों ने तालाब खुदवा लिए हैं, और उन्हें एक रुपया भी नहीं दिया गया है, वह अपनी आपबीती बताते हैं कि कृषि विभाग के अधिकारी सामने नहीं आए हैं। उनके पास कुछ लोग आए जिन्होंने तालाब खुदवाने से लेकर शासन से मिलने वाली राशि दिलाने की पूरी गारंटी ली गई। इन्हीं लोगों के द्वारा पोकलेन मशीन के माध्यम से तालाब खुदवाए गए और किसानों से 40 हजार से लेकर 80 हजार रुपए तक की नकद राशि ले ली गई। इस तरह किसानों ने यहां वहां से व्यवस्था कर अपनी ओर पोकलेन मशीन व ट्रैक्टर ट्रॉली द्वारा फैंके गए मलबे का भुगतान तो कर दिया गया। जिससे किसान अब अपने आपको लुटा पिटा महसूस कर रहा है।
आधे अधूरे व पुराने तालाबों का होता था भुगतान
बताया जाता है कि कृषि विभाग के भू-सर्वेक्षण विभाग में बैठे अधिकारियों तक दलालों की सीधी पहुंच थी। दलालों द्वारा किसान से मामला सेट होने पर दस्तावेज बनकर ऑफिस पहुंच जाते थे और ले-देकर भुगतान कर दिया जाता था। जिले में ऐसे अनेक उदाहरण मिल जाएंगे, जिनमें पुराने व आधे अधूरे तालाबों का पूरा भुगतान किया गया है। जिसका उदाहरण हटा ब्लॉक की आदिवासी ग्राम पंचायत दामोतिपुरा में देखा जा सकता है। बताया जाता है कि वहां के किसान कुशाल आदिवासी व जेता आदिवासी दोनों सगे भाईयों के खेतों में वर्ष 2012 में योजना अंतर्गत तालाब बना दिए गए थे। फिर 2016-2017 में उन्हीं पुराने तालाबों व दोनों सगे भाईयों के नाम पर नए सिरे से बलराम ताल योजना का लाभ दिलाने का मामला सामने आया था।
Published on:
02 Oct 2018 11:18 am
बड़ी खबरें
View Allदमोह
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
