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दमोह

सर्किट हाऊस पहाड़ी ने ओढ़ी हरियाली की चादर

शहर की प्राचीन धरोहर में शामिल सर्किट हाउस पहाड़ी पर इस समय प्रकृति मेहरबान है। वैसे को बारहों माह पहाड़ी की खूबसूरती देखते ही बनती हैए लेकिन बारिश के मौसम में छटा कई गुना बढ़ जाती है। इस दौरान पहाड़ी पर सैर सपाटा करने वालों का तांता लगने लगता है

दमोहJul 03, 2024 / 11:31 am

pushpendra tiwari

दमोह. शहर की प्राचीन धरोहर में शामिल सर्किट हाउस पहाड़ी पर इस समय प्रकृति मेहरबान है। वैसे को बारहों माह पहाड़ी की खूबसूरती देखते ही बनती हैए लेकिन बारिश के मौसम में छटा कई गुना बढ़ जाती है। इस दौरान पहाड़ी पर सैर सपाटा करने वालों का तांता लगने लगता है। इन दिनों भी सर्किट हाउस पहाड़ी पर कुछ इसी तरह के नजारे देखने को मिल रहे हैं। पखवाड़े भर की बारिश के बाद पहाड़ी ने हरियाली की चादर ओढ़ ली है। ऐसे में पहाड़ी हरी नजर आ रही है। शहर की आपाधापी और कर्कश ध्वनि से दूर लोग सुकून व शांति के लिए पहाड़ी पर घूमने प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। खास बात ये है कि सर्किट हाउस पहाड़ी उन लोगों के लिए भी सहज स्थल बना हुआ हैए जो व्यायामए योग व ध्यान के शौकीन हैं। पहाड़ी पर ऐसे अनेक लोग पहुंच रहे हैं। जो यहां योग व व्यायाम कर रहे हैं। ऐसे लोगों का मानना है कि पहाड़ी पर आने से ऐसा लगता हैे हम प्रकृति के बीच आ गए हों। यहां योग व व्यायाम में कोई बाधा भी नहीं होती। वहीं पहाड़ी पर घूमने आए दिनेश प्यासी, जितेंद्र सोनी, रामबाबू, सुधीर पटेल, नीरज सिंह, बृजेश चतुर्वेदी समेत अन्य युवाओं ने बताया कि शहर में सर्किट हाउस पहाड़ी से ज्यादा खूबसूरत कोई दूसरा स्थान नहीं है। यहां पर प्राचीन सर्किट हाउस हो या फिर पहाड़ी पर छटा बिखेरती प्राकृतिक सुंदरता बेमिसाल है। यहां जो सुकून और शांति हैए वो कहीं नहीं।
पहाड़ी पर और क्या है खास

करीब 2 किमी लंबी चढ़ाई चढऩी होती है। तब जाकर सर्किट हाउस पहाड़ी के ऊपर पहुंचते हैं। हरियाली व पेड़.पौधों की वजह से पहाड़ी का माहौल पूरी तरह शांत और खूबसूरत है। ऊपर से पूरे शहर का अद्भुत व्यू देखने को मिलता है। पहाड़ी सर्किट हाउस की वजह से खास तौर से पहचानी जाती है, लेकिन यहां स्थित कुछ स्थल भी विशेष हैं। ऊपर चढऩे पर दाईं ओर झीलनुमा जगह दिखती है। जिसमें बारिश का पानी भर जाता है। इसके पास ही हनुमान मंदिर भी है।
ब्रिटिश काल में बना था सर्किट हाउस

सर्किट हाउस पहाड़ी शहर की सामान्य पहाड़ी हुआ करती थी। ब्रिटिश हुकूमत के वक्त अंग्रेज अफसरों को ठहरने के लिए पहाड़ी पर सर्किट हाउस बनवाया गया। तब से इसका नाम सर्किट हाउस पहाड़ी पड़ गया और यह दर्शनीय स्थल में शुमार हो गई। सर्किट हाउस बनने के बाद यहां सौंदर्यीकरण भी हुआ। ब्रिटिश राज का अंत होने के बाद प्रशासन के हाथ में सर्किट हाउस के रखरखाव की बागडोर आई। कुछ साल पहले सर्किट हाउस पहाड़ी पर तत्कालीन कलेक्टर ने सौंदर्यीकरण करण के लिए यहां विशेष कलाकृतियां स्थापित कराईं थीं।
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अनियंत्रित होकर आटो रिक्शा पलटने से चालक की मौत, सवार गंभीर घायल

बटियागढ़. थाना अंतर्गत बटियागढ़ दमोह मार्ग पर पैट्रोल पंप के पास एक ऑटो रिक्शा अनियंत्रित होकर पलटने से ऑटो चालक चुन्नीलाल अहिरवार निवासी बकायन की मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक घायल परिजन शेलेंद्र ने बताता कि बटियागढ़ से ऑटो रिक्शा से बकायन गांव जा रहे थे कि बीच रास्ते में पेट्रोल पंप के पास ऑटो रिक्शा अनियंत्रित हो गया और पलटा गया, जिसमें चालक चुन्नी लाल अहिरवार गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे बटियागढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। इधर पुलिस द्वारा पंचनामा कार्रवाई कर मामले की जांच शुरू की है। वहीं घटना में गंभीर घायल को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है।

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