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दमोह में 100 मीटर की दूरी पर बदल जाती है कलेक्टर गाइड लाइन

कॉलोनाइजरों व दलालों ने बढ़वा दिए जमीनों के रेट

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कॉलोनाइजरों व दलालों ने बढ़वा दिए जमीनों के रेट

कॉलोनाइजरों व दलालों ने बढ़वा दिए जमीनों के रेट

दमोह. दमोह शहर व ग्रामीण क्षेत्र में आवासीय जमीनों के रेट सागर, जबलपुर व भोपाल से भी अधिक हैं। वहीं कलेक्टर गाइड लाइन 100 मीटर से 500 मीटर की दूरी पर बदलती हुई नजर आ रही है। जिससे लोग कहते हैं कि दमोह में सबसे अधिक रेट हैं।
पत्रिका ने पड़ताल की तो इस मामले में स्टांप ड्यूटी का बड़ा घोटाला उजागर हो रहा है। कलेक्टर गाइड लाइन का दमोह में निर्धारण जमीनों की रजिस्ट्री की आधार पर किया जा रहा है। हर साल जमीन की दरें निर्धारित करने के लिए कलेक्टर गाइड लाइन में फेर बदल के लिए दावे आपत्तियों के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाता है, लेकिन रजिस्ट्री कार्यालय तक दावे-आपत्तियों के लिए आमजन नहीं पहुंचते हैं, जिससे कॉलोनाइजर, जमीन के दलाल अपने मन मुताबिक दमोह शहर की जमीनों के भाव अन्य शहरों की अपेक्षा बढ़ाए हुए हैं। नई कलेक्टर गाइड लाइन का निर्धारण होना है, लेकिन पुरानी गाइड लाइन पर नजर डाली जाए तो आसपास की जमीनों और कॉलोनियों के दामों में भारी अंतर दिखाई दे रहा है।
एक जैसे वार्ड के नाम पर बड़ा घोटाला
सूत्र बताते हैं कि दमोह शहर में रजिस्ट्री के दौरान सबसे ज्यादा स्टांप की चोरी की जाती है। जिसमें रजिस्ट्री कार्यालय के अधिकारियों की मिली भगत रहती है, उदाहरण के लिए मांगज वार्ड 1 के कलेक्टर गाइड लाइन में अधिक रेट हैं और मांगज वार्ड नंबर 2 के कम रेट तो मांगज वार्ड 1 में होने वाली रजिस्ट्री मांगज वार्ड नंबर 2 के रेट के हिसाब से करा ली जाती है, फिर 6 माह या साल भर बाद भूल सुधार का आवेदन दिया जाता है। सूत्र बताते हैं कि जितनी भी बड़ी रजिस्ट्रीयां हुईं यदि उनकी निष्पक्ष जांच की जाए तो करोड़ों का सालों से चल रहा घोटाला उजागर हो सकता है।
सुझावों के नाम पर हो रहा बड़ा खेल
रजिस्ट्री कार्यालय में 4 मार्च तक दावे-आपत्तियां मंगाए गए थे, लेकिन इन दावे व आपत्तियों में किसी भी नागरिक ने दमोह शहर की गाइड लाइन की दरें कम करने के लिए आवेदन नहीं लगाया है, इसमें सर्वाधिक आवेदन कॉलोनाइजरों के हैं, जिसमें उनके द्वारा जिस कीमत पर जमीन बेची जा रही है, उसी हिसाब से दरें बढ़ाने के लिए आवेदन दिया गया है।
एक ही स्थान के तीन तरह की दरें
कलेक्टर गाइड लाइन में वर्गमीटर के हिसाब दरें निर्धारित हैं। मलैया मिल से न्यू शक्ति नगर कॉलोनी होते हुए नपा की सीमा रोड तक 4400 रुपए प्रति वर्ग मीटर निर्धारित है। मलैया मिल के बाजू से न्यू शांति नगर कॉलोनी की दर 4 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर निर्धारित है। वहीं तीसरी दर तीन गुल्ली से मलैया मिल तक 8800 रुपए वर्ग मीटर निर्धारित की गई है। इस तरह एक ही क्षेत्र की तीन दरों का निर्धारण होने से कलेक्टर गाइड लाइन में भ्रम की स्थिति बनने पर रजिस्ट्री में बड़ा खेल होता है उसके बाद संशोधन करा लिया जाता है।
लाइन और क्षेत्र एक रेट अलग-अलग
शहर की सीमा से बाहर नगरीय क्षेत्र में विकसित हो रही कॉलोनी एक ही लाइन और एक ही क्षेत्र में है, लेकिन सबके अलग-अलग रेट निर्धारित हैं। जैसे कृष्णा हाइट कॉलोनी मौजा लाडऩबाग 5600 रुपए प्रति वर्ग मीटर, लाडऩबाग कल्चुरी गार्डन 4800 रुपए प्रति वर्गमीटर, लाडऩबाग सिद्धि विनायक 5600 रुपए वर्ग मीटर, लाडऩबाग से आरटीओ 7600 रुपए वर्ग मीटर, लाडऩबाग से रामकुंज कॉलोनी 4 हजार रुपए वर्ग मीटर निर्धारित है। इसी तरह चौपरा खुर्द में शिवनगर कॉलोनी का रेट 6 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर निर्धारित है, जबकि उसी के सामने स्थित चौपरा खुर्द वैशाली नगर की जमीन का रेट 8400 रुपए प्रति वर्ग मीटर कलेक्टर गाइड लाइन में निर्धारित है।
कलेक्टर गाइड लाइन से अधिक वसूलत हैं कीमत
सूत्र दावा करते हैं कि दमोह शहर में करोड़ों रुपए के रजिस्ट्री के खेल में वर्गमीटर और फुट के फेर में बड़ा खेल किया जा रहा है। 1 वर्ग मीटर में 10.७६ फुट होता है। जैसे मान लिया जाए कि जमीन का रेट 8400 रुपए है तो 1 फुट का रेट 840 रुपए के आसपास आएगा, लेकिन दमोह शहर की प्रत्येक कॉलोनी में 1500 से लेकर 3000 हजार वर्ग फुट के हिसाब से जमीन बेची जा रही है, जिससे दमोह में कलेक्टर गाइड लाइन से भी अधिक कीमत पर जमीनों की खरीद-फरोख्त हो रही है, स्टांप ड्यूटी बचाने लिए रजिस्ट्री कम की कराई जाती है।