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दमोह में सुनार नदी के तटीय गांवों में बिगड़ सकती हैं परिस्थितियां

जिले में बारिश का दौर जारी है। ऐसे में नदी.नालों का जलस्तर बढ़ रहा है। नदी किनारे बसे व जल्द बाढग़्रस्त होने वाले गांव को लेकर आपदा प्रबंधन की टीम अलर्ट पर है। प्रशासन ने पहले से ही ऐसे गांव चिन्हित कर लिए थे।

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दमोह. जिले में बारिश का दौर जारी है। ऐसे में नदी.नालों का जलस्तर बढ़ रहा है। नदी किनारे बसे व जल्द बाढग़्रस्त होने वाले गांव को लेकर आपदा प्रबंधन की टीम अलर्ट पर है। प्रशासन ने पहले से ही ऐसे गांव चिन्हित कर लिए थे। जहां बारिश के दौरान जलभराव या बाढ़ की स्थिति बनने वाली थी। उन गांवों पर आपदा प्रबंधन लगातार नजर बनाए हुए है। यदि परिस्थितियां बिगड़ती है, तो ऐसे गांव में फौरन राहत कार्य शुरू किए जाएंगे। जरूरत पडऩे पर गांवों को खाली भी कराया जा सकता है।
जिले में सुनार नदी से सबसे अधिक गांव प्रभावित होते हैं। दरअसलए सुनार नदी किनारे बड़ी संख्या में गांव बसे हुए हैं। इनमें भी हटा और पथरिया ब्लॉक गांव सबसे अधिक हैं। क्योंकि जिले में सुनार नदी इन दोनों ही ब्लॉक से ज्यादा रास्ता तय करती है। इस समय सुनार नदी का जलस्तर काफी बढ़ चुका है। यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहाए तो सुनार नदी का उफान पर आना तय है और ऐसे में नदी के तटीय गांवों में परिसिथतियां बिगड़ सकती हैं। हालांकि आपदा प्रबंधन पहले से ही किसी भी स्थिति से निपटने के लिए मुस्तैद है।
नदी किनारे बसे गांवों में आपदा प्रबंधन की टीम लगातार नजर रख रही है। नदी के जो पुल व पुलिया जल्द उफान पर आते हैं, वहां सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। पुल व पुलियों पर पानी आने पर आवागमन रोक दिया जाएगा। इस दौरान लोगों को आवागमन की अनुमति नहीं होगी।

सुनार किनारे बसे ज्यादातर गांव हटा व पथरिया के

जानकारी के अनुसार हटाए पटेरा व पथरिया ब्लॉक से निकली सुनार नदी के किनारे पांच दर्जन से ज्यादा गांव बसे हुए हैं। इनमें भी ज्यादातर गांव पथरिया व हटा ब्लॉक के हैं। हटा ब्लॉक के तीन दर्जन से अधिक गांव ऐसे चिन्हित किए गए, जो सुनार नदी किनारे या फिर आसपास ही बसे हुए हैं। वहीं पथरिया ब्लॉक के दो दर्जन से ज्यादा गांव चिन्हित हैं, जो नदी किनारे बसे हैं। बाकी नदी किनारे बसे करीब आधा दर्जन गांव पटेरा ब्लॉक के हैं।

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स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र परिसर में पानी भरने से बच्चों को हो रही परेशानी
पटेरा. क्षेत्र के अधिकतर स्कूलों के परिसर में पानी निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण जल भराव बना हुआ है। इसी तरह आंगनबाड़ी केंद्रों का हाल है। परिसर में पानी भरा होने से बच्चों को आने जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि ये समस्या आज की नहीं है, बल्कि कई वर्ष पुरानी है। जिसके निराकरण के लिए संबंधित संस्थाओं के शिक्षक, कार्यकर्ता लगातार मांग करते आ रहे हैं पर नगर परिषद, पंचायतों द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

जनपद पंचायत पटेरा के पास स्थित शासकीय प्राथमिक शाला व आंगनबाड़ी केंद्र परिसर में भी बारिश का पानी भरा हुआ है। इस कारण छात्र छात्राओं व आंगनबाड़ी के बच्चों को केंद्र तक आने जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस ओर न तो शिक्षा विभाग ध्यान दे रहा है और न ही नगर परिषद।
शिक्षकों का कहना है कि उनके साथ ही छात्र छात्राओं को स्कूल तक पहुंचने के लिए परिसर में भरे पानी में से होकर गुजरना पड़ता है। चूंकि पानी में जहरीले जीव जंतु होने का अंदेशा होने के कारण भय भी बना रहता है कि कहीं वह काट न लें। कई बार संबंधितों से पानी निकासी की उचित व्यवस्था कराने की मांग की गई है ,पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।