
दमोह. मध्यप्रदेश लेखक संघ इकाई दमोह के तत्वावधान में स्थानीय रामकुमार विद्यालय में हिंदी पखवाड़े के तहत हिंदी विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
डॉ. एनआर राठौर ने कहा कि हिंदी मात्र भाषा नहीं ये हिंदुस्तान की संस्कृति की संवाहक है, जिसका सतत प्रवाह अनवरत जारी है। हिंदी भाषा पहले से ज्यादा मजबूत होकर उभर रही है। इसकी स्वीकार्यता हिंदुस्तान के बाहर कई देशों तक पहुंच चुकी है। मुख्य अतिथि डॉ. खरे ने हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विश्व में सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषाओं में हिंदी तीसरे स्थान की भाषा है। इसके स्तर को अभी और ऊंचा ले जाना है। विशिष्ट वक्ता डॉ. पीएल शर्मा ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाले समय में हिंदी के महत्व को अधिक से अधिक लोग जानेंगे व हिंदी हिंदुस्तान की सर्वमान्य भाषा के रूप में स्वीकार होगी। यह राष्ट्रभाषा का दर्जा प्राप्त करेगी।
रामकुमार तिवारी ने कहा कि अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा प्रसार के उच्चमाप दंड, हिंदी माध्यम की शिक्षा प्रसार में भी अपनाए जाने चाहिए। रामेश्वर चतुर्वेेदी ने कहा कि हिंदी के अंकों की गणना अंगे्रजी गणना की तुलना मे ज्यादा वैज्ञानिक और तार्किक है। बीएम दुबे ने कहा कि हिंदी उत्थान के लिए केवल गोष्ठियों में विमर्श पर्याप्त नहीं है।
इंजी अमर सिंह राजपूत ने हिंदी वर्तनी को हिंगलिश वर्तनी से गंभीर किस्म का संकट माना। इस अवसर पर, रमेश तिवारी, ओजेन्द्र तिवारी, बबीता चौबे, जीपी मिश्रा, कालूराम नेमा, रमेश कुमार सोनी, पुरुषोत्तम रजक की मौजूदगी रही। विचार गोष्ठी का संचालन अमर सिंह राजपूत ने किया तथा आभार पीएस परिहार ने माना।
Published on:
01 Oct 2019 06:01 pm
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