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अंतर राष्ट्रीय शायर नैयर दमोही अब हमारे बीच नहीं रहे

पूर्व प्रधानमंत्री ने खत लिखकर दी थी मुबारकबाद

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Inter national poet Nair Damohi dies

Inter national poet Nair Damohi dies

दमोह. शहर दमोह की बुजुर्ग शख्सियत और मशहूर शायर नैयर दमोही साहब के निधन की खबर से साहित्य जगत व शहर के लोग स्तब्ध रह गए। जिन्होंने शहर के एक लाड़ले शायर को खो दिया।
नैयर साहब उर्दू अदब और कौमी एकता की बड़ी शख्सियत थे। वे हमारे अंचल की पहचान थे। नातिया कलाम में उनकी विशेष ख्याति थी। उनका निधन सोमवार की सुबह चिश्ती नगर में हो गया है।
उनका निधन उस समय हुआ है, जब चिश्ती नगर में सलाना उर्स भरा हुआ है और देश भर से प्रसिद्ध शायर इसमें भागीदार बने हुए हैं। इन सभी की मौजूदगी में चिश्ती नगर में ही घर के पास रात्रि 9 बजे सुर्पद ए खाक किया गया।
पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने पत्र खिल दी थी मुबारकबाद
10 जनवरी 1940 को दमोह में जन्में नूर मुहम्मद अदबी दुनिया में नैयर दमोही के नाम से मशहूर हुए। उनका शायरी का सफर 1960 में शुरु हुआ। इसके बाद लगातार तरक्की करते गए। 1982 में नैय्यर साहब को पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में आयोजित ने आलमी नात कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया था, जहां 22 देशों के शायरों ने हिस्सा लिया था। वहां नैयर दमोही को सेकंड प्राइज से नवाजा गया था। जिस पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें पत्र लिखकर मुबारकबाद देते हुए उनकी हौसला अफजाई की थी।
अनेक सम्मान से सम्मानित थे
नैय्यर साहब ने उर्दू शायरी की दुनिया में अपना अलग मुकाम हासिल किया है, हिंदुस्तान का कोई भी जलसा, ऑल इंडिया मुशायरों की महफिल में बड़े ही अदब से सुना जाता था। जिस पर उन्हें अनेक सम्मान भी मिले। मप्र शासन के निदा फाजली सम्मान के अलावा उन्हें अनेक सम्मानों से नवाजा गया। छग रायपुर में मुहफीजे उर्दू अवार्ड से नवाजा गया। पाकिस्तान करांची के एयर पोर्ट ट्रस्ट द्वारा अकीक पत्थर की शील्ड से सम्मानित किया गया था। करांची में ही बज्में रहमानी द्वारा चांदी का मेडल देकर सम्मानित किया गया था। सुहामुजद्दी गोल्ड मैडल सदर मंजिल भोपाल द्वारा दिया गया था। इसके अलावा हर मंच पर उन्हें सम्मान व श्रोताओं का सम्मान प्राप्त होता रहा है।
प्रमुख संग्रह
नैयर दमोही के अनेक संग्रह प्रकाशित हुए हैं। जिनमें प्रमुख रूप से अनवारे जमाल नात संग्रह 1983 में मुजफ्फरयूपी से, वारिशे नगमात नातो मनकबत 1994 में गाजीपुर में, शुआ- ए- नैय्यर गज़ल संग्रह उर्दू अकेडमी भोपाल से, अकीदत का चमन नात संग्रह 2004 में दमोह से, दुरे अफ्कार गज़ल संग्रह 2010 में दमोह से, तजल्ली नात सलाम संग्रह 2015 में भोपाल से प्रकाशित किया गया।