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मध्यप्रदेश में क्यों सड़कों पर नजर आ रहा जैन समाज, यहां बुलाया बंद

मध्यप्रदेश के अनेक जिलों में जैन समाज सड़क पर आकर प्रदर्शन करने मजबूर हैं, दमोह जिले में बाजार बंद रखकर प्रदर्शन किया गया, दमोह के तेंदूखेड़ा और जबेरा कस्बा के बाजार रहे बंद, कर्नाटक में जैन मुनि की हत्या का विरोध, कर्नाटक जैन मुनि हत्या मामला, Jain Muni Hatyakand karnataka, Jain Samaj

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दमोह

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Samved Jain

Jul 11, 2023

मध्यप्रदेश में क्यों सड़कों पर नजर आ रहा जैन समाज, यहां बुलाया बंद

मध्यप्रदेश में क्यों सड़कों पर नजर आ रहा जैन समाज, यहां बुलाया बंद

मध्यप्रदेश के अनेक जिलों में इन दिनों जैन समाज के लोग सड़कों पर नजर आ रहे हैं। प्रदर्शन किए जा रहे हैं, बाजार बंद किए जा रहे हैं और मुख्यमंत्री, राज्यपाल और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले इस तरह जैन समाज का सड़कों पर पार्टियों के लिए भी सिरदर्द बन रहा हैं।

मध्यप्रदेश के दमोह जिले में दो दिनों से जैन समाज का प्रदर्शन जारी है। यहां एक दिन पहले तेंदूखेड़ा और जबेरा में जैन समाज ने बंद का आव्हान कर दिया। जैन समाज ने समस्त दुकानों को बंद किया और लोगों से भी बंद कराया। इस दौरान लोगों ने सरकार के प्रति काफी गुस्सा देखने मिला। जैन समाज के लोगों का आरोप था कि सरकारें जंगल राज की तरह चल रही हैं। आम आदमी, संतों की सुरक्षा का किसी भी ध्यान नहीं हैं। खुलेआम अपराध हो रहे हैं और सरकारें इस ओर ध्यान न देकर वोट की राजनीति कर रही हैं।

- तेंदूखेड़ा और जबेरा में भी बुलाया गया बंद
कर्नाटक में हुई जैन संत की हत्या के विरोध में जैन समाज में खासा आक्रोश है। सोमवार को विरोध के चलते जबेरा व तेंदूखेड़ा क्षेत्र सुबह 11 से दोपहर 2 बजे तक बंद रहा। सभी प्रतिष्ठान बंद रहे। जैन समाज के अलावा सनातन धर्म प्रेमीए हिंदू संगठनों ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और पीएम के नाम एक ज्ञापन एसडीएम अविनाश रावत को सौंपा। सुबह 11 बजे विद्यानगर से एक विशाल रैली निकाली गई, जो तहसील कार्यालय पहुंची। सभी ने इस जघन्न हत्याकांड की निंदा की और कहा कि आरोपियों को मृत्यु दंड देना चाहिए ताकि देश में साधु संत सुरक्षित रहें और आगे इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति ना हो। ज्ञापन में कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में 5 जुलाई 2023 का दिन एक काला धब्बा है, जबकि कर्नाटक के बेलगाम के चित्तोड़ी पास हिरेकोड़ी में जैनाचार्य मुनिश्री कामकुमारनंदी महराज के अपहरण और उसके बाद की गई जघन्य हत्या शायद नादिरशाह और औरंगजेब के बाद की पहली घटना है, जबकि एक जैन मुनि की हत्या की गई है। अपराधियों के पकड़े जाने की सूचना स्थानीय प्रशासन ने दी है, लेकिन इतनी बड़ी घटना के पीछे सिर्फ दो लोग रहे होंगे यह बात मानने से जैन समाज इंकार करता है और मानता है कि इस घटना के पीछे प्रदेश की शांति और स्थिरता में विघटन व फूट डालने वाली शक्तियों का सहयोग व षडय़ंत्र अवश्य ही होना चाहिए। इसलिए घटना की विस्तृत जांच कराकर इस वीभत्स निंदनीय घटना से जुड़े हर व्यक्ति को फांसी की सजा सुनिश्चित की जाए। जैन समुदाय के सदस्यों के साथ साथ सर्व समाज संतो ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हत्या में शामिल आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की। आनंद धाम पीठाधीश्वर स्वामी रंजीतानंद सरस्वती के नेतृत्व में सर्व समाज के लोगों ने यह ज्ञापन दिया। इस अवसर पर आनंद धाम जबेरा के पीठाधीश्वर रंजीतानंद सरस्वती ने कहा जब संत सुरक्षित नहीं है, तो भारत सुरक्षित कैसे रहेगा। इस दौरान जबेरा तहसीलदार विवेक व्यास को ज्ञापन सौंपा गया।

कर्नाटक में जैन मुनि ही हत्या का मामला
दरअसल, कर्नाटक में जैन मुनि कामकुमार ही हत्या का मामला इस समय सामने आया है। जिसका असर मध्यप्रदेश में भी देखने मिल रहा है। दरअसल, कर्नाटक की जैन समाज ने देश भर में इसे लेकर आव्हान किया है। इसके लेकर मंगलवार को जैन समाज ने दोपहर १२ बजे एकत्र होकर दमोह शहर में मौन जुलूस निकाला और प्रदर्शन किया। इस दौरान कलेक्टे्रट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा गया।
- कर्नाटक जैन मुनि हत्या का यह है मामला
बता दें कि 6 जुलाई को जैन मुनि कामकुमार के लापता होने की खबर आई। वे नंदी पर्वत आश्रम के अपने कमरे में नहीं मिलेए जबकि उनकी पिच्छिका और कमंडल वहीं थे। 5 जुलाई की रात 10 बजे तक उन्हें कमरे में देखा गया था। जैन संत के आश्रम में नहीं मिलने पर उनके शिष्यों की चिंता बढ़ गई। काफी खोजबीन के बाद भी नहीं मिलने पर आचार्य कामकुमार नंदी चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष भीमप्पा उगारे ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। संदेह के आधार पर पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान दोनों ने जैन संत की हत्या करना कबूल किया। हत्या किस स्थान पर की और शव को कहां फेंका इस बात को लेकर दोनों आरोपी पुलिस को गुमराह करते रहे। रविवार को जैन मुनि के शव के टुकड़े कटकभावी गांव में एक बोरवेल से बरामद किए। पोस्टमॉर्टम के बाद शव के टुकड़े जैन समाज को सौंप दिए गए। रविवार को मुनिश्री का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

- मुनि कामकुमार के बारे में जानें
2009-10 में मुंबई में चातुर्मास करने के बाद से आचार्य कामकुमार हिरेकोड़ी आश्रम में ही रह रहे थे। 6 जून 1967 को बेलगाम जिले में जन्मे मुनिश्री को बचपन में भ्रमप्पा के नाम से जाना जाता था। आचार्य श्री कुंथुसागर जी से दीक्षा लेकर मुनि बने।