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एमपी का सबसे बड़ा डिस्पोजल फ्री आायोजन- यहां धातुओं के बर्तन में ही होगा लाखों लोगों का भोजन-पानी

यहां हर दिन लाखों लोगों हजारों की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं, वहीं लाखों लोगों के भोजन-पानी की व्यवस्था भी की गई है, इस भव्य आयोजन में पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है.

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दमोह. मध्यप्रदेश के दमोह जिले में स्थित कुंडलपुर जैन तीर्थ इन दिनों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है, यहां हर दिन लाखों लोगों हजारों की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं, वहीं लाखों लोगों के भोजन-पानी की व्यवस्था भी की गई है, इस भव्य आयोजन में पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है, यहां खाने-पीने से लेकर किसी भी प्रकार के आयोजन में डिस्पोजल का उपयोग नहीं किया जा रहा है, यहां पानी पीने के लिए भी तांबे के लौटे मंगवाए गए हैं।

दुनिया के सबसे बड़े जैन मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए कुण्डलपुर महामहोत्सव नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। यह संभवतया: प्रदेश का पहला आयोजन होगा, जो प्लास्टिक मुक्त होगा। खाने-पीने से लेकर हर काम में धातु के बर्तन का ही इस्तेमाल होगा। पीने के पानी के लिए ढाई लाख लोगों के लिए तांबे के लोटे रखे हैं। ट्रकों में बर्तन मंगाए गए हैं । पंचकल्याणक की शुरुआत गर्भ कल्याणक से हुई। बुधवार को पंचकल्याणक महोत्सव में भगवान के गर्भ में आने के संकेत मिलते ही सौधर्म इन्द्र का सिंहासन कंपायमान हुआ। कुबेर ने अयोध्या नगरी की रचना की। भगवान के गर्भ कल्याणक के पहले प्रक्रिया हुई। आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने कहा कि मनुष्य योनि में ही आत्म कल्याण का अधिकार है।

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आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत लेकर रोली-रोहित बने पात्र
जबलपुर के रोहित (41) और रोली जैन (३8) को सबसे कम उम्र में भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य मिला है। पंचकल्याणक में शामिल सभी पात्रों को जीवन भर कठोर नियमों की पालना करना होता है इसमें आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत भी शामिल है। सवा और आठ साल के बच्चों के बाद भी इस कठिन सयंमित व्रत की खासी चर्चा है।