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शांतिधारा के बाद हुई मुनि दीक्षा

पंचकल्याणक महामहोत्सव, क्षुल्लक विरंजन सागर ने किया केश लोचन, गणाचार्य विरागसागर ने बनाया मुनि
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Ajay Khare

Jan 19, 2016

दमोह। स्थानीय कृषि उपज मंडी परिसर में चल रहे पंचकल्याण महोत्सव के चौथे दिन भगवान पाश्र्वनाथ का तप कल्याणक और छुल्लक जनसंत विरंजनसागर महाराज का मुनि दीक्षा समारोह करीब 10 हजार श्रावकों की मौजूदगी में मनाया गया।
दमोह नगर के इतिहास में पहली बार हुए मुनि दीक्षा समारोह का साक्षी बनने के लिए हर कोई आतुर नजर आया। देश के विभिन्न शहरों से लोगों का सुबह से ही कार्यक्रम में पहुंचना शुरू हो गया। समारोह को लेकर श्रावकों का उल्लास इतना था कि बरसते पानी में भी किसी ने ध्यान नहीं दिया। इसके पहले सुबह 6 बजे से अभिषेक, शांतिधारा, पूजन का आयोजन किया गया। जिसमें इंद्र-इंद्राणियां और महापात्रों ने नृत्य किया। इस कार्यक्रम के बाद कलशयात्रा निकाली गई, जो आयोजन स्थल से सदगुवां जैन मंदिर पहुंची। जहां शुद्धि कार्य हुआ।
मुनि बने जनसंत
प्रवचन के बाद मुनि दीक्षा समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान छुल्लक विरंजन सागर महाराज मंच पर विराजमान आचार्य विरागसागर महाराज के समक्ष पहुंचे। उनके गृहस्थ जीवन के माता-पिता भी मौजूद थे। आचार्यश्री ने जनसंत को बाजू से बैठाकर केश लोचन करवाया। विरंजन सागर ने अपने हाथों से सिर व चेहरे के बालों को लोचन किया। आचार्यश्री द्वारा संस्कार मंत्र प्रक्रिया पूरी करने के बाद लंगोट और गमछा का त्याग सभी के समक्ष किया। इसके बाद आचार्यश्री ने जनसंत विरंजन सागर मुनि दीक्षा दी।इस दौरान लोगों का उत्साह देखते ही बना। पांडाल आचार्य गुरुवर और जनसंत के जयकारों से गूंज उठा। कार्यक्रम का समापन सम्मान समारोह के साथ किया गया।
जन्मे भगवान आदिनाथ, रत्नों की हुई वर्षा
तारादेही में आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में चल रहे श्रीमज्जिनेन्द्र शांतिनाथ जिनबिम्ब पंच कल्याणक प्रतिष्ठा गजरथ महोत्सव व विश्व शांति महायज्ञ के चौथे दिन भगवान आदिनाथ का जन्म कल्याणक मनाया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में मौजूद इंद्र-इंद्राणी भगवान के जन्म पर जमकर झूमे, नाचे और खुशियां व्यक्त की। इस मौके पर देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी बारिश के दौरान भी रही।
तारादेही में चल रहे इस महोत्सव के दौरान सुबह से महापात्रों और इंद्र-इ्रदांणियों ने भगवान का अभिषेक-पूजन बड़े ही श्रद्धाभाव और उल्लास के साथ किया। जिसे ब्रह्मचारी विनय भैया और अन्य ने संपन्न कराया। इसके बाद भगवान आदिनाथ का जन्मकल्याण शुरू हुआ। जिसमें महापात्र के यहां सुबह करीब साढ़े 10 बजे भगवान आदिनाथ का जन्म हुआ। जन्म होते ही पूरा पंडाल खुशी से झूम उठा, इंद्र-इंद्राणियां झूमकर नाचने लगी। सौधर्म इंद्र, कुबेर ने रत्नों की बारिश कर दी।