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शंका समाधान प्रणेता मुनि प्रमाण सागर अभी कहां है, यहां हुई अगवानी

आचार्य विद्यासागर के शिष्य मुनि प्रमाण सागर महाराज संघ के वरिष्ठ मुनि है। मुनि प्रमाण सागर कुंडलपुर दमोह में हुए आचार्य पद पदारोहण कार्यक्रम के लिए कुंडलपुर पहुंचे थे। मुनि प्रमाण सागर का विहार अपडेट। मुनि प्रमाण सागर अभी दमोह में विराजमान है। मुनि प्रमाणसागर की अगवानी में उमड़ी भीड़

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दमोह

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Samved Jain

May 03, 2024

Muni Praman Sagar

Muni Praman Sagar

दमोह. आचार्य विद्यासागर के शिष्य मुनि प्रमाण सागर के साथ मुनि निर्वेग सागर,विराट सागर, संधान सागर, निसंग सागर के दमोह नगर आगमन पर जैन समाज के साथ जैनत्तर गणमान्य व्यक्तियों ने भव्य अगवानी की। इसमें पुरुष और महिलाओं के साथ-साथ युवा वर्ग की बहुत बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।

मुनि सघ ने हिंडोरिया से पद विहार करते हुए करैया हजारी में रात्रि विश्राम करने के पश्चात प्रात: काल 5:30 बजे दमोह के लिए प्रस्थान किया। जो समन्ना, गढ़ी मोहल्ला ,पुराना थाना, घंटाघर से होते हुए बड़ी संख्या में लोग दिगंबर जैन धर्मशाला पहुंचे। अनेक स्थानों पर मुनिश्री के पादप्रच्छालन के साथ आरती उतारी गई। जैन धर्मशाला में मुनिश्री के पद प्रक्षालन व आहार देने का सौभाग्य अभय बनगांव को प्राप्त हुआ। आचार्यश्री की पूजन के पश्चात मुनिश्री के मंगल प्रवचन हुए।

सभा के प्रारंभ में मुनिश्री विराट सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि मुनि प्रमाण सागर के हर शब्द में प्रमाणिकता होती है, उनका मेरे जीवन पर बहुत उपकार है, जिसे कभी विस्मृति नहीं किया जा सकता। उनसे मैंने अपने जीवन में काफी कुछ सीखा है। इसके पश्चात मुनि प्रमाण सागर ने कहा कि गुरु कितने बड़े हैं, यह महत्व नहीं रखता, बल्कि हमारी श्रद्धा कितनी बड़ी है यह महत्व की बात है। हमारी श्रद्धा ही गुरू को बड़ा बनाती है।

अर्जुन को गुरु द्रोणाचार्य का वह लाभ नहीं मिला जो लाभ श्रद्धा के बल पर एकलव्य ने प्राप्त कर लिया। गुरू हमारे हृदय की वेदी पर विराजमान होने चाहिए। श्रद्धा का तत्व अंतिम सांस तक बना रहना चाहिए। श्रद्धा की ज्योति को सदैव जागृत रखना चाहिए। गुरू की बातों को समझना व एक दूसरे को समझना आवश्यक है। मोक्ष मार्ग आत्मा की समझ है। अपने स्वरूप की व आपसी समझ को बनाकर रखें। जहां समझ है वहां आनंद है। आज जरूरत विवेक की है, आवेग में विवेक नष्ट हो जाता है। बहुत लोग अतिरेक और अतिरंजन के बहाव में बहुत कुछ नष्ट कर देते हैं।

सही समझ से काम ले तो सही नतीजे पर पहुंचते हैं। धुंआ उडऩे का समय नहीं है। धुंआ की जगह सुगंध फैलाओं। हम आपके हैं आप हमारे हैं जीवन का मूल मंत्र बना के रखना चाहिए। यह मंत्र हर जगह कार्य करता है। टीम के साथ हो तो ताकत बढ़ जाती है, अकेले ताकत कम हो जाती है। हमें केवल टीम की बात करनी है। गुरू के प्रति समर्पण हमें लक्ष्य की ओर आगे ले जाता है। हमारा लक्ष्य गुरू के नाम को और गुरु के काम को आगे बढ़ाना है।

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दमोह. बांदकपुर की पावन धरा पर जगत 4 दिन से विराजमान निर्यापक पुगंव मुनि सुधा सागर महाराज की मंगल प्रेरणा और आशीर्वाद से बांदकपुर में पारसनाथ धाम के नाम से एक भव्य जैन तीर्थ पाषाण का मंदिर बनने जा रहा हैं। जिससे जिले की पूरी जैन समाज में भारी उत्साह है। बांदकपुर की छोटी जैन समाज के प्रत्येक घर से बढ़-चढ़कर तन मन धन से सहयोग दिया जा रहा है। आज मंदिर निर्माण के अगले चरण में चार दिवसीय सहस्त्रनाम विधान का आयोजन पुंगव मुनि सुधा सागर के सानिध्य में से प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया अशोकनगर वालों की मार्गदर्शन में 3 मई से 6 मई तक शुरू हो गया है। जिसमें सौधर्म सुनीता सुनील डबुल्या, कुबेर सुलेखा प्रदीप डबुल्या ,महायज्ञानायक प्रियंका संजय जैन पिपरिया वाली ध्वजारोहण करता रेखा संजय डबुल्या महापात्रा बने । ध्वजारोहण के पश्चात मंदिरजी से घट यात्रा प्रारंभ हुई। घट यात्रा की समाप्ति पर मंडप शुद्धि, पात्र शुद्धि के साथ विधान प्रारंभ हुआ। इस दौरान सागर जैन समाज ने मुनिश्री के समक्ष श्रीफल भेंट किया और सागर की ओर विहार करने का आग्रह किया। सागर समाज के सभी मंदिरों के अध्यक्ष के साथ सभी लोगों ने मुनिश्री को श्रीफल अर्पण किया। मुनि सुधासागर के आहार राजकुमार जैन, सुनील जैन सन्मति परिवार के चौक में हुए। शुक्रवार को जिज्ञासा समाधान में बड़ी संख्या में भक्तों ने अपनी-अपनी जिज्ञासा मुनिश्री से समक्ष रख समाधान प्राप्त किया।