
दमोह. जिले के सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में चातुर्मास कर रहे निर्यापक मुनि श्री समयसागर महाराज का संघ सहित पिच्छिका परिवर्तन समारोह उत्साह पूर्वक संपन्न हुआ। निर्यापक मुनि श्री समय सागर महाराज की पुरानी पिच्छिका को प्राप्त करने का सौभाग्य प्रेमचंद्र संध्या जैन को प्राप्त हुआ।
इनके अलावा मुनि श्री प्रषस्त सागर, मुनि श्री मल्लि सागर, मुनि श्री आनंद सागर महाराज, मुनि श्री निग्र्रन्थ सागर मुनिश्री निभ्र्रांत सागर, मुनिश्री निरालस सागर, मुनिश्री निराश्रव सागर, मुनिश्री निराकार सागर, मुनिश्री निष्चिंत सागर, मुनिश्री निर्माण सागर, मुनि श्री नि:षंक सागर, मुनिश्री निरंजन सागर, मुनिश्री निर्लेप सागर महाराज की पिच्छिका प्राप्त करने का सौभाग्य भक्तों को मिला।
इस अवसर मुनि श्री को शास्त्र भेंट किया गया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री समय सागर महाराज ने कहा कि संयम बहुत दुर्लभ है। संयम का अर्थ होता है नियंत्रण जिस तरह बिना ब्रेक की गाड़ी होती है। संयम धारण करने वाले संसार में विरले होते हैं। संयम दो प्रकार का होता है। प्राणी संयम और इंद्रि संयम। मोक्ष मार्ग में 4 उपकरणों की आवश्यक्ता होती है। मयूर पिच्छिका, कमण्डल और शास्त्र बाह्य उपकरण हैं।
विनय सम्पन्नता से मोक्ष मार्ग प्रशस्त होता है। आज के समय में संयम का नहीं वरन असंयम के उपकरण टीवी, मोबाइल आदि से मनुष्य का बहुमूल्य जीवन व समय बर्बाद हो रहा है। लौकिक ज्ञान के अर्जन के लिए पूरी दुनिया में भ्रमण कर रहा है मानव लेकिन उसे कुछ प्राप्त नहीं हो पा रहा है। संस्कारों से वह दूर होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज आज भी एक युवा की तरह युवाओं को संयम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
Published on:
31 Oct 2019 05:18 pm
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