
दमोह. माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के रिजल्ट आउट होने के बाद अब मंथन का दौर जारी है। अधिकारियों ने अपने मत्थे से कार्रवाई का कलंक दूर करने अब शिक्षकों को टारगेट किया है। कलेक्टर के इस आदेश के बाद शिक्षा विभाग में हलचल शुरू हो गई है। जिसमें कलेक्टर ने ऐसे सभी शिक्षकों की परीक्षा लेने की डेट जारी कर दी हैं, जिनके विषय शिक्षक होने के बाद उक्त विषय में 30 प्रतिशत से कम रिजल्ट आया है।
जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार आदेश प्राप्त होते ही ऐसे शिक्षकों की संख्या का संकलन शुरू कर दिया है। प्राचार्यों को पत्र जारी कर ऐसे शिक्षकों की जानकारी चाही गई है। जिले में ऐसे १ हजार से अधिक शिक्षक होने का अनुमान है, जिनके विषय का रिजल्ट 30 प्रतिशत से कम आया है।
इस तरह होगी शिक्षकों की परीक्षा
जिले के हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों के शिक्षकों का रिपोर्ट कार्ड लिया जाएगा।
30 प्रतिशत से कम रिजल्ट देने वाले विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को परीक्षा की सूचना जारी होगी।
चयनित सभी शिक्षकों को उनकी कक्षा से संबंधित पुस्तक के साथ आना होगा। उसी के आधार पर उनसे प्रश्न किए जाएंगे।
50 प्रतिशत या उससे अधिक अंक लाना शिक्षक के लिए अनिवार्य होगा, नहीं तो कार्रवाई की जाएगी।
8 जून को यह परीक्षा आयोजित की गई है। जिसमें हाई और हायर सेकेंडरी के शिक्षक ही शामिल होंगे।
दो साल से नकल पर सख्ती से लगाई लगाम: कलेक्टर
दमोह. परिणाम सामने आने के बाद अब अधिकारी अपने-अपने तर्क अभिभावकों के सामने रख रहे हैं। कलेक्टर सुधीर कोचर ने भी बयान जारी करते हुए लिखा है कि दो साल से नकल में सख्ती से लगाई लगाम गई, जो कम रिजल्ट प्रतिशत की वजह रही है। ऐसे में स्थानीय लोग कह रहे हैं कि साहब, पहले तो सिर्फ नकल से ही बच्चे पास होते आ रहे थे। कलेक्टर के इस बयान के लोग अलग-अलग मायने भी निकालकर देख रहे हैं।
कलेक्टर सुधीर कोचर ने कहा कोचर ने कहा पिछले दो वर्षों में नकल पर बहुत सख्ती से लगाम लगाई है और उसमें बहुत ज्यादा सख्ती हुई है। इस कारण से परीक्षाएं पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न हुई है, जो रिजल्ट आया है, सामने है वह बहुत वास्तविक रिजल्ट है। उन्होंने कहा जिले के रिजल्ट में रातो-रात सुधार नहीं हो सकता है। यह कड़ी मश्क्कत का काम है और कम से कम 4 से 5 साल लेगा, तब जाकर के इसके परिणाम देखने के लिए मिलेंगे।
Published on:
09 May 2025 11:11 am

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