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प्रभा अलंकरण समारोह में गूंजी स्वर लहरियां कवियों ने किया कविताओं से सरावोर

आयोजन में मां को लेकर सुनाईं कविताएं

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Poets echoed the poems in Prabha Adornment ceremony

Poets echoed the poems in Prabha Adornment ceremony

दमोह. प्रभा अलंकरण समारोह के आयोजन में काव्यरस की वर्षा के दौरान कवियों को प्रभा अलंकरण समारोह से सम्मानित किया गया। इस दौरान कवियों की स्वर लहरियों के बीच सभी ने एक से बढ़कर एक कविताएं सुनाते हुए सभी का दिल जीत लिया।
आयोजक डॉ. गणेश द्वारा अपनी मां की स्मृति में हर वर्ष कराए जाने वाले इस कार्यक्रम में उन्होंने कविता पढ़ते हुए कहा कि 'सारी दुनियां मेरी मुट्ठी में होती थी मां, मेरे लिए मथुरा थी, मां मेरे लिए काशी थीÓ पढ़ा तो पूरा सदन तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा। प्रभा स्मृति अलंकरण समारोह एवं काव्य गोष्ठी में काव्यगोष्ठी मां के लिए समर्पित रही। मुख्य अतिथि विमल लहरी एवं विशिष्ट अतिथि डॉ रमेशचंद्र खरे, डॉ. एनआर राठौर, वरिष्ठ साहित्यकार दादा नारायण सिंह ठाकुर रहे। अध्यक्षता वरिष्ठ व्यंग्यकार डॉ. रघुनंदन चिले ने की। समारोह का शुभारंभ मां वीणापाणी के पूजन से होने के बाद बीएम दुबे ने सरस्वती बंदना प्रस्तुत की।
प्रभा अलंकरण सम्मान पत्र का वाचन सागर के कवि वृंदावन सरल ने किया। प्रभा स्मृति अलंकरण सम्मान पत्र वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद डॉ. सत्य मोहन वर्मा को मंचासीन अतिथियों द्वारा प्रदान किया गया। जिन्हें शॉल-श्रीफ ल से सम्मानित किया गया। वरिष्ठ साहित्यकारों ने डॉ. सत्यमोहन वर्मा के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनकी साहित्य क्षेत्र में अर्जित उपलब्धियों की सराहना की। डॉ. वर्मा ने अपने उद्बोधन में सभी को नसीहत भी दी कि साहित्य सृजन भले ही कम हो लेकिन उत्तम हो, इसका हम सभी को ध्यान रखना चाहिए। गरीबी ओढ़ती थी, गरीबी बिछाती थी, मां मुझे नबाबी के सारे मजे फिकरी में चखाती थी। सारी दुनियां मेरी मुठ्ठी में होती थी का पाठ जब डॉ. गणेश राय ने पढ़ा तो पूरा हाल तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा। समारोह में पूर्व डीइओ डॉ. पीएल शर्मा, अमर सिंह राजपूत, नरेन्द्र दुबे, प्रदीप अग्रवाल, नरेन्द्र अजरिया, आसिफ अंजुम, रमेश तिवारी, पीएस परिहार, बबीता चौबे शक्ति, मनोरमा रतले, ओजेंद्र तिवारी, हेमलता दुबे, संगीता दुबे, आराधना राय, अनुनय श्रीवास्तव, रामकुमार तिवारी, आनंद जैन, कृष्ण कुमार चौबे, महेंद्र श्रीवास्तव, आदर्श दुबे, कालूराम नेमा, सुदामा पाठक, प्रमोद गांगरा आदि ने भी मां के ऊपर लिखी कविताओं का वाचन किया। संचालन बीएम दुबे ने व आभार डॉ. गणेश राय ने माना।