
Political surgery must be Dr. Ritu Dua
दमोह. मैं स्वास्थ्य के क्षेत्र से जुड़ी हुई हूं। लेकिन राजनीति में भी बहुत रुचि रखती हूं। किसी पार्टी से मेरा कोई नाता नहीं है। लेकिन सभी राजनेताओं को सुनने व उनके क्रिया कलापों पर मेरी नजर रहती है। आज के समय की यदि बात की जाए तो पहले की अपेक्षा काफी बदलाव आया है। जिसमें अगर हम डॉक्टरी भाषा में कहें तो रानीति की सर्जरी होना बहुत आवश्यक हो गया है। पहले के राज नेतओं को देखती सुनती थी, तो उसमें व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोप नहीं होते थे। सीधा सा समस्याओं व विकास की बात होती थी। नेता लोग अपने द्वारा कराए गए विकास कार्यों की बातें करते थे। विपक्ष समस्याओं को उठाता था। लेकिन आज के नेता इन सबसे हटकर केवल एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाने में लगे रहते हैं। जिससे न तो देश का भला होने वाला है और न ही किसी व्यक्ति का। इसके लिए हम सर्जरी से ही बदलाव कर सकते हैं। पत्रिका का जो चेंजमेकर अभियान चला वह भी इसी बदलाव को लेकर है। जिसका मैं समर्थन करती हूं। क्योंकि यदि राजनीति में बेहतर लोग आगे नहीं आएंगे। तो निश्चित ही कम पड़े लिखे लोग या कम समझ रखने वाले लोग न तो कोई विकास करा पाएंगे न ही देश का भला होने वाला है।
शहर में आया काफी बदलाव
मैं सन १९८५ में जब विवाह होने के बाद दमोह आई तो मुझे थोड़ा अजीब सा लगता था। क्योंकि मैं शुरू से ही कार चलाती थी। और जब दमोह में कार ड्राइव करके जाती थी, तो लोग मुझे टोकते थे। बच्चों को लेकर अस्पताल आने वाले लोगों में दादा-दादी की संख्या काफी अधिक होती थी। लेकिन अब काफी बदलाव आया है। पहले बैलगाड़ी की जगह अब मां स्वयं अपने बच्चे को कार से या स्कूट से दिखाने के लिए स्वयं आ जाती है। पहले घरों से बाहर नहीं निकलने वाली महिलाओं को अब कोई रोकटोक नहीं है। जिससे लगता है कि लोगों में जागरुकता आई है।
इस कमी को पूरा करना है जरूरी -
डॉ. ऋतु दुआ बताती हैं कि हमारे शहर के युवक-युवतियां बाहर जाकर शिक्षा ग्रहण करते हैं और फिर कहीं बाहर ही जाकर नौकरी करने लगते हैं। इससे हमारे की शहर का विकास कम होता है। लोगों को लाखों रुपए खर्च करके बाहर न जाना पड़े इसके लिए शहर में ही बेहतर स्कूल, कॉलेज व ओद्योगित संस्थानों की आवश्यकता है। जिससे लोग यहीं शिक्षित होकर किसी उद्योग धंधे में अपनी सेवाएं देकर दमोह को ही विकसित करने में आगे बढ़ाएं।
देश के प्रति नहीं रहा समर्पण-
पहले के नेताओं में देश के प्रति एक समर्पण की भावना जो दिखाई देती है वह गायब होती जा रही है। यही कारण है कि बदलाव की राजनीति को बल मिलने लगा है। इसके लिए मैं तो डॉक्टरी भाषा में कहूंगी कि अब लीवर ट्रांस्प्लांट की तरह आवश्यकता महशूस होने लगी है। जिससे लोग कम से कम राजनीति स्वच्छ करने के साथ देश भक्ति की सच्ची आस्था रख सकें। जिस तरह से डॉक्टरों में आत्मीयता होती है उसी तरह से नेताओं को भी जनता के प्रति आत्मीयता रखना जरूरी है। यही कारण है कि राजनीति में भी सर्जरी की शख्त आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि आज भी दमोह से जबलपुर तक की सड़कें खराब हो गईं हैं। इस विषय पर ही कितना उलटफेर हुआ। पहले जो खराब सड़कों पर इसी जनता ने सरकारों ेको बदल दिया था। आज फिर वही समय देखने मिल रहा है। सड़कों के निर्माण की पुन: आवश्यकता नजर आने लगी है।
इनकी आवश्यकता जरुरी-
शहर में अभी भी हैल्थ सर्विस के साथ सफाई अभी भी कोषों दूर है। हरियाली व शिक्षा में स्कूल कॉलेज व महिलाओं की सुरक्षा बहुत कम है। जिससे इन क्षेत्रों में सीधा किडनी से लेकर हार्ट तक अगर ट्रांसप्लांट किया जाना चाहिए। तब कहीं हम कुछ विकास होने की बात कह सकते हैं।
जैसा कि लक्ष्मीकान्त तिवारी को डॉ. ऋतु दुआ-बीएएमएस आयुर्वेदिक मेडीसिन ने बताया।
Published on:
26 Sept 2018 11:55 am
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