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पहाड़ी पर खुदाई में मिल रहे कीमती मोती, खोदने में जुटे 5 गांव के लोग

माता टोरिया उगल रही सुलेमानी पत्थर..बाहर से आकर खरीद ले जाते हैं व्यापारी..

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दमोह. जिले की वीरान पहाड़ियां मोती उगल रही है, नोहटा थाना क्षेत्र के विसनाखेड़ी गांव की माता टोरिया नामक पहाड़ी के 50 एकड़ के दायरे में पिछले दो माह से रंग-बिरंगे मोती या मनके निकल रहे हैं, जिन्हें स्थानीय ग्रामीण सुलेमानी पत्थर के नाम से जानते हैं। जबलपुर रोड पर दमोह शहर की सीमा से 177 किमी दूर ग्राम विसनाखेड़ी गांव की माता टौरिया में खुदाई करने के लिए सुबह से बड़ी संख्या में लोग जा रहे हैं दिन भर खुदाई कर रहे हैं। यहां के लोगों का कहना है कि दो माह पहले किसी को खुदाई में रंग-बिरंगे मोती मिले, जिन्हें बाहर के व्यापारियों को दिखाया जिन्होंने इन पत्थरों का नाम सुलेमानी पत्थर बताया, छोटे पत्थर की कीमत 500 रुपए और बड़े पत्थर की कीमत 5 हजार रुपए तक दी गई।


जैसे ही पहाड़ी पर मिल रहे इन पत्थरों के बारे में ग्रामीणों को खबर लगी तो अब रोजाना बड़ी संख्या में लोग यहां पर इन कीमती पत्थरों को खोजने के लिए पहुंच रहे हैं। देखते ही देखते ये यहां के लोगों का व्यवसाय बन गया है, अब लोग लगातार खुदाई करते हैं, इसके बाद सप्ताह में अनजान व्यापारी उनके गांव में आते हैं और इन पत्थरों को खरीदकर ले जाते हैं ग्रामीणों की मानें तो पिछले दो माह से विसनाखेड़ी गांव के लोगों को अच्छी कमाई हो रही है, दिन भर 10 से 12 मोती पत्थर एकत्रित करने पर अच्छी कमाई हो रही है, जिससे कई लोग अपना मूल कामधंधा छोड़ इसी काम में लग गए हैं। यहां सुबह होते ही लोग गैती, फावड़ा व अन्य खोदने योग्य सामग्री लेकर पहाड़ी पर खुदाई करने पहुंच जाते हैं। इन मोतियों की तलाश में खोज शुरु कर देते है। यहां के आस पास के अन्य 5 गांव के लोग भी अब मजदूरी छोड़कर इन कीमती मोतियों की तलाश में जुट गए हैं।

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हजारों साल पुराने हैं पत्थर
इतिहासकारों की मानें तो हजारों साल पहले यहां किसी राजा का किला था। उस युग के दौरान गले में पहनने वाले कीमती मोतियों की मालाएं पहनी जाया करती थी। जिनके मोती अब खुदाई के दौरान यहां से निकल रहे है। यह काफी पुराने और बेजोड़ हैं, जिन्होंने हजारों साल मिट्टी में दबने के बाद अपना रंग और असर नहीं खोया है। हालांकि ग्रामीणों के हिसाब से जो कीमत मिल रही है वह उनकी मजदूरी के हिसाब से ज्यादा है, लेकिन उनका यह भी मानना है कि जब व्यापारी इतने महंगे दामों पर खरीद रहे हैं तो बाजार में इसकी कीमत अधिक होगी तभी तो उनके द्वारा खोदे जा रहे मोतियों को खरीदने के लिए बाहर से व्यापारी उनके गांव सीधे चले आते हैं।

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