
अफसर के बच्चों के साथ महंगे स्कूल में पढ़ेगी एक बंदी की बेटी
दीपक पटेल .
मेरा क्या कसूर। ये शब्द उस बेटी के जीवन पर सटीक बैठते हैं, जो 1 साल की उम्र में अपने माता-पिता द्वारा किए गए अपराध की सजा उनके साथ जेल में रहकर काट रही हैं। 3 साल यहां गुजारने के बाद उसकी उम्र अब 4 हो गई हैं और अब वह जेल से रोज पढऩे स्कूल जाएगी। हटा में ऐसा मामला पहली बार सामने आया है, जब किसी बच्चें को जेल से रोज स्कूल भेजा जाएगा और वापसी भी वहीं होगी। वह भी उस स्कूल में पढ़ेगी, जिसमें जेलर के बच्चे पढ़ते हैं।
दरअसल, हटा अनुविभाग में रहने वाले प्रहलाद लोधी और उसकी पत्नी हटा उपजेल में धारा 302, 304, 498 में निरुद्ध हैं। इनके साथ इनकी बेटी राधिका भी 3 वर्ष पहले साथ ही जेल में आई थी। जो अब 4 वर्ष की हो गई हैं। बीते दिनों जेलर की उस बेटी पर नजर पड़ी तो उन्होंने उसे पढ़ाने का इच्छा जाहिर की। इसके बाद समस्त स्वीकृतियां लेकर मंगलवार को उसका दाखिला शहर के प्रतिष्ठित निजी स्कूल में कराया गया। इसके बाद अब रोज राधिका जेल से स्कूल जाएगी और वापस भी आएगी। जेलर की इस पहल पर लोग सराहना कर रहे हैं।
जेलर नागेंद्र चौधरी ने बताया कि १० जुलाई को जेल के निरीक्षण के दौरान एक अबोध बालिका से उनका सामना हुआ। उन्होंने उससे पूछा स्कूल में पढऩे जाना है , राधिका ने स्वीकृति में सिर हिला दिया, लेकिन उसे जेल से अपनी मर्जी से सीधे किसी स्कूल भेज देना जेल मैनुअल के हिसाब से उचित नहीं था । उसकी इच्छा का सम्मान करते हुए जेलर ने सबसे पहले उसके माता-पिता आरती एवं प्रहलाद लोधी से उनकी सहमति प्राप्त की। इसके बाद पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए न्यायालय से अनुमति प्राप्त की और अपने स्वयं के बच्चों के साथ उसका नाम स्कूल में लिखवा दिया है।
मंगलवार को उसका पहला दिन था। जेल मैनुअल के अनुसार निर्धारित समय पर उसे स्कूल भेजा जाएगा और वापस लाया जाएगा। साथ ही जेल स्थित भोजन शाला से ही तैयार लंच उसे प्रदान किया जाएगा। बता दें कि राधिका के माता-पिता उपजेल हटा में पिछले 3 साल से निरुद्ध हैं। घर में किसी अन्य जिम्मेदार के ना होने के कारण यह बिटिया राधिका उनके साथ ही जेल में रहती है।
Published on:
11 Jul 2023 07:50 pm
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