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धर्म की रक्षा का पर्व है रक्षाबंधन: आचार्य उदार सागर

701 मुनिराजों के उपसर्ग को दूर किया गया था

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दमोह

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rakesh Palandi

Aug 27, 2018

Rakshabandhan is the festival of protection of religion

Rakshabandhan is the festival of protection of religion

दमोह. धर्म की रक्षा का पर्व रक्षा बंधन है। इस पर अपने प्रवचन देते हुए आचार्य उदार सागर ने विस्तार दिया। चातुर्मास कर रहे आचार्य ने कहा कि किस तरह अकंपाचार्य आदि 701 मुनियों पर उपसर्ग आने पर विष्णु दत्त मुनि ने वामन का वेष धारण करके राजा बलि से तीन पग जमीन मांगी थी। घमंड में चूर राजा बलि ने उन्हें तीन पग जमीन नापने को कह दिया था। मुनि विष्णुकुमार ने पहले पग में पृथ्वी और दूसरे पद में पर्वत को नापने के बाद जब तीसरे पद रखने के लिए महाराज बलि से जगह मांगी तो वह उनके चरणों में गिरकर माफी मांगने लगे।
श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन मुनि विष्णुकुमार द्वारा इस तरह 701 मुनिराजों के उपसर्ग को दूर किया गया था। तभी से जैन संस्कृति में वात्सल्य पर्व रक्षाबंधन मनाया जा रहा है। इसके पूर्व धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि उप शांतसागर जी महाराज ने कहा कि यह पर्व अकेले भाई बहन का पर्व नहीं है। रक्षा सूत्र बांधकर हम धर्म की रक्षा का, राष्ट्र की रक्षा का, समाज की रक्षा का संकल्प लेते हंै। यदि उस समय विष्णु कुमार मुनि ने 701 मुनियों का उपसर्ग दूर नहीं किया होता तो आज शायद मुनि देखने को नहीं मिलते। आज हमें सहजता से मुनियों का सानिध्य प्राप्त हो रहा है, तो हम उनके आहार, विहार व्यावृत्ति के प्रति लापरवाह होते जा रहे हैं। हमने मुनियों को भी पंथ में बांट दिया है, जो कि गलत है आपके क्षेत्र में जो भी दिगंबर मुनि आते हैं। उनकी आहार-विहार सहित अन्य चर्या को तारा नाभि संपन्न कराना भी श्रावक की जिम्मेदारी है।
श्रेयांसनाथ का निर्वाण पर्व मनाया
जैन मंदिरों में वात्सल्य पर्व रक्षाबंधन के अवसर पर पूजन, विधान के साथ जैन धर्म के 11 वें तीर्थंकर भगवान श्रेयांसनाथ का निर्वाण पर्व मोक्ष कल्याणक भक्ति भाव के साथ मनाया गया। इस मौके पर सभी जैन मंदिरों में विशेष पूजन विधान के आयोजन करके निर्वाण लाडू चढ़ाए गए। इस अवसर पर श्री पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन नन्हे मंदिर जी की धर्मशाला में आचार्य उदार सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में विशेष पूजन विधान का आयोजन किया गया। आचार्यश्री के मुखारविंद से शांतिधारा करने का सौभाग्य गिरीश जैन परिवार व डॉ. पीके जैन परिवार को प्राप्त हुआ। भगवान श्रेयांसनाथ का मोक्ष कल्याणक भी आचार्यश्री के सानिध्य में मनाया गया। इस मौके पर निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य मानक चंद, राजेश कुमार परिवार, रूपचंद, नवीन निराला परिवार व राजेंद्र अटल परिवार को प्राप्त हुआ। इस मौके पर विभिन्न क्षेत्रों से आए आचार्य श्री के शिष्यों ने श्रीफल भेंट करके आचार्यश्री से मंगल आशीष प्राप्त किया। वहीं आचार्यश्री सहित चार गुरु आचार्यों के चित्र रक्षासूत्र भेंट करने का सौभाग्य भी श्रावक जनों को प्राप्त हुआ।