
Samosa lover Fatty acids Rural Mudiya village
हटा (दमोह). मोटू-पतलू कॉमिक व कार्टून सीरियल में जिस तरह मोटू समोसों का दिवाना रहता, उसी तरह का कुछ अंदाज हटा व दमोह मार्ग पर मुडिय़ा गांव की एक समोसो दुकानों पर चलती गाडिय़ों के ब्रेक लग जाते हैं और यहां के समोसे खाए बगैर लोग आगे नहीं बढ़ते हैं।
14 साल पहले कमलेश ने गांव में दुकान खोली। शुरुआती में उन्होंने काफी जद्दोजहद की। इसके बाद उन्होंने रिसर्च किया कि लोगों को उनके समोसे कैसे पसंद आएंगे। उन्होंने समोसे के साथ कैथा, टमाटर की चटनी के साथ मठे को साथ में रखना शुरू किया। इसके बाद समोसे के मसाले को जायकादार बनाने का प्रयास किया। अब हालत यह है कि लोग इनके समोसे के ऐसे दिवाने हैं कि हटा रुट पर जाने पर लोग दमोह या हटा में नाश्ता नहीं करते हैं मुडिय़ा गांव पहुंचकर ही समोसों का स्वाद लेते हैं।
नारायण प्रजापति हटा ने बताया कि हम लगभग पांच सालों से यहां के समोसे खाते आ रहे हैं, इसका स्वाद और महक बहुत प्रिय है। समोसे के साथ यहां की चटनी भी लाजवाब रहती है। जब भी दमोह जाना होता है। समोसे की खुशबू पड़ते ही गाड़ी में बरबस ब्रेक लगना शुरू हो जाते हैं।
बृजेंद्र साहू हटा ने बताया कि मुझे मुडिय़ा के समोसे बहुत ही अच्छे लगते हंै, जब भी यहां से गुजरना होता है, अपने पूरे परिवार के लिए समोसे यहां से लेकर जाते हंै। यह खाने मे बहुत ही स्वादिष्ट लगते हैं।
बृजेंद्र कटरहा दमोह ने बताया कि उन्हे मुडिया के समोसे बेहद पसंद है। जब भी यहां से गुजरते है गरमा-गरम समोसे खाकर ही जाते है, सबसे ज्यादा यहां की चटनी पसंद है।
दुकानदार कमलेश पटैल ने बताया कि लगभग 14 साल से वह यहां पर अपना समोसे की दुकान चला रहे हंै। गांव की आबादी बहुत कम है, लेकिन यहां से गुजरने वाले लोगों को यहां के समोसे बहुत पसंद हैं। दिन भर मे लगभग 900 समोसों की बिक्री होती है, गांव की आबादी कम है, इसलिए यहां के ग्राहक न के बराबर हैं। सभी बाहरी ग्राहक इस छोटे से गांव की छोटी सी दुकान पर पहुंचते हैं।
Published on:
03 Apr 2018 04:06 pm
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