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बांस के बिजना से होते हैं सजना-सजनी के पहले दीदार

बुंदेलखंड की वैवाहिक परंपरा में विशेष महत्व है बांस के बर्तनों का

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Special importance is the bamboo utensils

Special importance is the bamboo utensils

दमोह. बुंदेलखंड की वैवाहिक परंपराओं में कुछ ऐसी वस्तुएं रची-बसी हैं कि इनके बगैर रस्में पूरी नहीं होती हैं। बांस का बिजना (पंखा) भले ही गर्मी में हवा करने के काम आता हो, लेकिन इस बिजना के कारण ही वर-वधू की सबसे पहले निगाहे मिलती हैं और एक दूसरे के दीदार करते हैं।
बुंदेलखंड में हिंदू रीति रिवाज के अनुसार बांस के बर्तनों में चुलिया, टिपारे, ढौरिया, छीटा, बिजना, सूपा, सुपलिया, सिंदौरा, सिदुंरियां, रगवारों का वैवाहिक परंपरा में विशेष महत्व है। यदि विवाह के दौरान वर या वधू पक्ष में से कोई भी इन बर्तनों को भूल जाता है तो उसे तत्काल में व्यवस्था करनी पड़ती हैं, तब तक वैवाहिक रस्में थमीं रहती हैं। रंग बिरंगे इन बांस के बर्तनों का जीवन निर्वाह की परंपराओं में विशेष योगदान हैं। जो नव युगल को जीवन की गाड़ी में आगे ले जाने का संदेश देते हैं।
मंडप में फैंका जाता है
जब वर बारात लेकर पहुंचता है तो द्वाराचार के बाद मंडप में प्रवेश करता है, जहां वधू द्वारा वर को देखते हुए उसके ऊपर चावल फैंके जाते हैं, वर के हाथ में सजा हुआ बिजना रहता है जो मंडप पर फैंका जाता है, इसके बाद वैवाहिक अन्य रस्में यानि वरमाला से विवाह संस्कार प्रारंभ होता है।
समधन की कलाकृति समाती है
जब बेटी विदा होती है तो उसकी मां द्वारा विभिन्न प्रकार के कलात्मक पकवान बनाए जाते हैं, यह पकवान सूखे होते हैं, जिनमें मैंदा, बेसन का प्रयोग किया जाता है कि ताकि वे कई दिनों चल सकें। इसके अलावा पावड़, बरी, बिजौरे सहित अन्य खाने पीने के उपयोग की सामग्री इन बांस के बर्तनों में भेजी जाती है। इन पकवानों के बनाने में इस बात का खास ख्याल रखा जाता है कि कम से कम एक या दो हफ्ते तक चल जाएं। इसी तरह जब ससुराल पहली विदा होकर वधू अपने मायके जाती है तो वर पक्ष की और से समरौठी इन्हीं बांस के बर्तनों में भरकर पहुंचाई जाती है।
आधुनिक युग में जमकर क्रेज
बुंदेलखंड में होने वाले विवाहों में इन बांस के बर्तनों का अब भी जमकर क्रेज है। भले ही युवा पढ़लिखकर आईटी क्षेत्र में काम कर रहे हैं, लेकिन उनके विवाह संस्कारों में भी इन बर्तनों का उपयोग करने में उन्हें कोई संकोच नहीं है। हालांकि आधुनिक समय के चलते इनके कारीगरों ने भी इन्हें कलात्मकता प्रदान करने की कोशिश की है, जो आकर्षक दिखने लगे हैं।
बांस का बनता है मंडप
वर व वधू के घरों में विवाह के शुरुआती यानि मंडप के दिन दोनों जगह घर के सामने बांस का मंडप सजाया जाता है। बांस का महत्व बुंदेलखंड की शादियों में वंश वृद्धि से जोड़ा जाता है, जिससे बांस की आवश्यकता मंडप से लेकर इसके बर्तनों में महत्वपूर्ण है, जिसके बगैर बुंदेलखंड के वैवाहिक संस्कार पूर्ण नहीं होते हैं।